सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ योग भी सीखेंगे। योग व खेलकूद की कवायद शुरू करने की प्रक्रिया विभाग ने आरम्भ कर दिया है। सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राएं अब पढ़ाई के साथ ही शारीरिक शिक्षा, योग व खेलकूद के भी गुर सीखेंगे। नई शिक्षा नीति को ले हर जिले से एक शारीरिक शिक्षक व शिक्षिका को तीन दिनों का प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिले से भी इसके लिए शिक्षक को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद जिले में मिडिल व हाई स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिए जाने के आसार हैं। स्कूलों में नौवीं तक के बच्चों को शारीरिक शिक्षा, योग व खेलकूृद की गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इसके बाद दक्ष बच्चों को उनकी दक्षता के आधार में रिपोर्ट कार्ड में अंक जोड़ा जाएगा। स्कूल की ओर से अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा में शारीरिक शिक्षा, योग व खेलकूद की गतिविधियों का भी मूल्यांकन किया जाएगा एवं इसी आधार पर रिपोर्ट कार्ड में अंक जोड़े जा सकेंगे। बदलते जीवन शैली में योग व शारीरिक शिक्षा तथा खेल का अपना महत्व है। लिहाजा बच्चों में होने वाले तनाव से इससे मुक्ति मिलेगी और छात्र- छात्राएं इससे अपने को तनाव मुक्त अनुभव कर सकेंगे। इसे सिलेबस में भी शामिल किए जाने की विभागीय कवायद शुरू की गई है। स्कूली बच्चों को हर शनिवार को योग व खेलकूद की गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है। शनिवार को स्कूलों में योग, व्यायाम, खेलकूद सांस्कृतिक आदि गतिविधियां कराए जाने से बच्चों को काफी फायदा होगा। बच्चों के मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत: खेल और योग मूल्याकंन के आधार पर भी सभी स्टूडेंट्स के रिपोर्ट कार्ड तैयार किए जाएंगे। शारीरिक शिक्षा को लेकर विभाग द्वारा कहा गया है कि आजकल की जीवन शैली में बहुत बदलाव आया है। लोग तरह-तरह की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इन बीमारियों से हमारे बच्चे भी अछुते नहीं है। इस खेल और योग शिक्षा से बच्चों की सेहत में काफी बदलाव आएगा और तनावमुक्त करने का ये एक बहुत ही बढ़िया माध्यम है। इसके लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् को इसपर बिना किसी देरी के लागू करने का निर्देश दिया है।
