सरकार की मुफ्त एम्बुलेन्स व्यवस्था पर निजी एम्बुलेन्स संचालक भारी पड़ रहे हैं।अस्पताल के गेट व अंदर तक निजी एम्बुलेन्स लगा रहता है। बेहतर सेवा देने के नाम पर निजी एम्बुलेन्स चालक मरीज को ले जाते हैं। जबकि सरकार के द्वारा मुफ्त में वेंटीलेटर युक्त या फिर ऑक्सीजन सिलेंडर सहित अन्य उपकरण युक्त एम्बुलेन्स उपलब्ध कराया गया है। अक्सरहां इमरजेंसी में रेफर मरीज को एम्बुलेन्स मिलने की प्रक्रिया में कुछ विलंब होने का फायदा निजी एम्बुलेन्स वाले उठा लेते हैं। इसमें कुछ अस्पताल कर्मी भी शामिल हैं। जिला को उपलब्ध है 78 एंबुलेंस बताया जाता है कि सरकार ने जिला में 78 एम्बुलेन्स दे रखा है। जिसमें 27 में वेंटिलेटर की भी सुविधा है। शेष में ऑक्सीजन सिलेंडर एनलाइजर की सुविधा है। बावजूद निजी एम्बुलेन्स हावी हैं। जानकर बताते हैं कि सरकारी एम्बुलेन्स के लिये पहले 102 पर डायल करना पड़ता है। इधर सदर अस्पताल प्रबंधन के द्वारा काफी सख्ती के बाद सदर अस्पताल में निजी एम्बुलेन्स का दबदबा कम तो हुआ है मगर निजी एंबुलेन्स का आना जाना लगा हुआ है। बताया जाता है कि सदर अस्पताल में 6 एम्बुलेन्स हैं। जिसमे दो वेंटीलेटर वाला है। सदर अस्पताल के एम्बुलेन्स में एक या दो हमेशा प्रोटोकॉल में व्यस्त रहता है। तीन से चार एम्बुलेन्स प्रसुता को लाने व प्रसव के बाद घर तक छोड़ने में लगा रहता है। कुछ एम्बुलेन्स रेफर मरीज को लेकर जाता है। इस बीच के इमरजेंसी मरीज के लिए अगल बगल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एंबुलेंस मंगवाना पड़ता है जिसमे काफी लेट होने की स्थिति में गम्भीर जख्मी निजी एम्बुलेन्स का सहारा लेते हैं। वेंटीलेटर वाले एम्बुलेन्स छोड़ शेष एम्बुलेन्स काफी खटारा स्थिति में होने के कारण ड्राइवर लोकल में ही चलना चाहते हैं। पटना जाने में हिचक होने का भी लाभ निजी एंबुलेंस वाले लेते हैं।