यू-डायस भरने में 80 फीसदी स्कूल साइबर कैफे पर निर्भर हैं। स्कूलों के पास कंप्यूटर नहीं है और अधिकांश शिक्षक व प्राचार्य भी तकनीकी रूप से दक्ष नहीं हैं। इस कारण स्कूल प्रबंधन को परेशानी हो रही है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के सूत्रों की मानें तो डाटा भरने की गति धीमी होना अधिकतर स्कूल कंप्यूटर के साथ शिक्षकों के जाति आधारित गणना में शामिल होना बताया जा रहा है। परंतु अब जनगणना पर रोक के बाद गति आ सकती है। जिले में कुल नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या 1434881 है। वहीं 5 मई तक 435713 छात्र-छात्राओं का डाटा एंट्री हुआ है। बता दें कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा पहली बार यू-डायस में सभी नामांकित छात्रों की जानकारी मांगी गयी है। अब तक स्कूल और शिक्षकों का डाटा ही मांगा जाता था, लेकिन इस बार स्कूल में नामांकित छात्र-छात्राओं की जानकारी मांगी गई है। ऐसे में उन स्कूलों के लिए मुश्किल बढ़ गई है जहां पर नामांकन से अधिक छात्रों की संख्या है। सूत्रों के मुताबिक एक से आठवीं तक 20 फीसदी ऐसे स्कूल हैं जहां पर छात्रों का नामांकन तो है लेकिन छात्र स्कूल ही नहीं आते। ऐसे छात्रों का डाटा स्कूल को आसानी से नही मिल पा रहा है।