कृषि विज्ञान की छात्राओं ने शून्य जुताई की तकनीक का किया अवलोकन पीपराकोठी। कृषि विज्ञान केंद्र में रावे कार्यक्रम के अंतर्गत तिरहुत कृषि महाविद्यालय ढोली की छात्राओं ने रामगढ़वा में किसानों के खेतों में शून्य जुताई का अवलोकन किया।  केंद्र प्रमुख सह वैज्ञानिक डॉ. अरविंद  कुमार सिंह, मनीष कुमार, डाॅ. एन बी चानू एवं राजेश कुमार के साथ रामगढवा के प्रगतिशील किसान सतदेव प्रसाद से मिलकर शून्य जुताई तकनीक को समझा। किसान ने विद्यार्थियों से शून्य जुताई तकनीक में अपनी सफलता की सफर को भी साझा किया। वह अन्य किसानों को जीरो टिलेज तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। तथा इसका प्रसार कर रहे हैं। उनके पास जीरो टिलेज मशीन, कंबाइन हार्वेस्टर, स्ट्रॉ रीपर ,मल्टीक्रॉप थ्रेसर एवं लैंड लेवलर  जैसे कृषि उपकरण हैं। जिनसे वह अपने खेत में  उपयोग करने के अलावा किराए पर भी देते है। सभी मशीनों का छात्राओं ने अध्ययन किया। छात्राओं ने खेतों में लगाई गई गेहूं की एचडी 2967 किस्म का भी अवलोकन किया। जो तेज हवा में भी नहीं गिरती । वहां के मृदा के अनुसार गेहूं में एक सिचाई पर्याप्त होती है। जो बुआई के 20-21 दिन बाद की जाती है। बताया गया कि जीरो टिलेज वह प्रक्रिया है जिसमें फसल के बीज ड्रिलर के माध्यम से बिना पूर्व भूमि तैयार किए बीज बोया जाता है। जहां पिछली फसल के ठूंठ मौजूद होते हैं। वहां की मिट्टी को नष्ट कर दिया जाता है। यह विधि फसल की अवधि को कम करती है। इस प्रकार जल्दी फसल प्राप्त की जा सकती है। शून्य जुताई तकनीक अधिक उपज प्राप्त करने में सहायक होता है। यह भूमि की तैयारी के इनपुट को कम करने में सहायता करती है। एवं बाहरी सिंचाई की आवश्यकता को कम करने के लिए मिट्टी में अवशिष्ट नमी का उपयोग करती है। छात्राओ ने जाना कि यह कार्बन पृथक्करण में वृद्धि के कारण ग्रीनहाउस प्रभाव को कम करती है। यह मृदा अपरदन, अपवाह द्वारा जल की हानि को रोकती है। यह वाष्पीकरण को धीमा कर देती है। इससे वर्षा जल का बेहतर अवशोषण होता है। अंततः भूमि की उपज बढ़ जाती है।