बंजरिया के चांटी माई मंदिर में सोमवार को पूजा सम्पन्न होने के बाद पशुओं की बलि शुरू हो गई। जानकारी देते हुए मंदिर समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद ने बताया कि चांटी माई के दरबार मे सालों भर बलि देने की प्रथा है। परन्तु नववर्ष के पूजा के अवसर पर साथ ही दशहरा में नवमी तक बलि नही दी जाती है। सोमवार को विधिवत पूजा समाप्त होने के साथ ही बलि दी जाने लगी। सोमवार को पहली बलि फुलवार के बिटू सिंह के खसी की दी गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 16 में उन्होंने माता से नौकरी के लिए मन्नत मांगी थी। जो पूरी हो गई जिसके बाद उनके लिए बलि देने लाया हूँ।