बिहार राज्य के सीतामढ़ी से दीपक पटेल और इनके साथ बर्डगियां प्रखंड निवासी डॉक्टर लिपि विश्वाश हैं। वे मोबाइल वाणी के माध्यम से सभी अभिभावकों से कहती हैं कि लड़का और लड़की में कभी भेद- भाव नहीं करना चाहिए। आज के समय में लड़कियाँ उन सभी कार्यों को करने में सक्षम है जो लड़के करते हैं।वहीँ दूसरी ओर देखा जाए तो हमारे समाज से दहेज़ प्रथा ख़त्म नहीं हुआ है। कई जगह यह सुनने को मिलता है कि दहेज़ के कारण बहु-बेटियों को ससुराल में प्रताड़ित किया जाता है। यदि बेटियाँ पढ़ी-लिखी रहेंगी तो अपना अधिकार कानूनन रूप से ढूंढ लेंगी। अतः अभिभावक अपनी बेटियों की शादी 18 वर्ष के बाद ही करें।
