परिहार प्रखंड के एक गाँव में बाल विवाह होने की सूचना जैसे ही जिलाधिकारी को प्राप्त हुई जिला प्रशासन तुरंत एक्शन में आ गया,और प्रशासन की तत्त्परता से बाल विवाह को रोक दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार बालिका की शादी नेपाल में होना तय हुआ था। सूचना प्राप्त होते ही ,जिला पदाधिकारी सुनील कुमार यादव के निर्देश पर बाल विवाह रोकने के लिए वरीय उप समाहर्ता रंजना भारती के नेतृत्व में स्थानीय थाना के सहयोग से बालिका का उम्र का भौतिक सत्यापन की गई। सत्यापन के दौरान उपलब्ध आधार कार्ड में अंकित जन्म तिथि का अवलोकन किया गया जिसके अनुसार उम्र 16 वर्ष की थी ,वैसे वास्तवित रूप से देखने पर बालिका का उम्र लगभग 13 - 14 वर्ष प्रतीत हो रही थी। ग्रामवासीयो की उपस्थिति अग्रेतर विधि सम्मत कार्यवाही की जा रही है।इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी सह बाल विवाह निषेध पदाधिकारी संजीव कुमार के द्वारा पंचायत परामर्शी समिति के अनुमोदन पर बांड बनवाकर बालिका को अभिभावक को सुपुर्द किया गया। सदर एसडीओ राकेश कुमार ने बताया बाल विवाह, बचपन खत्म कर देता है। बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम के अंतर्गत आर्थिक दंड के साथ कारावास की सजा का भी प्रावधान है। जिलाधिकारी ने कहा की बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त करने को लेकर जिला प्रशासन काफी गंभीर है। प्रथम संस्था के वरिष्ठ कार्यक्रम समन्वयक सुधीर कुमार ने बताया बाल विवाह जैसे कुप्रथा के उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास होना महत्वपूर्ण है। मौके पर मनोहर कुमार केसरी, रीता कुमारी प्रथम संस्था के बिरेन्द्र कुमार, प्रथम चाइल्ड लाइन से महिमा कुमारी, बिलटू प्रसाद, अमित कुमार आदि मौजूद रहे।
