सदर अस्पताल मे मना विश्व तम्बाकू निषेध दिवस दवा खाने से बेहतर है तम्बाकू सेवन से दूरी सटीक जानकारी से बचाई जा सकती है कई जानें मुज्ज़फरपुर/ 31 मई : विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर स्वस्थ समिति के नशा मुक्ति विभाग में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया गया. इस दौरान तम्बाकू सेवन से बढ़ रहे कई गंभीर रोगों के विषय में विस्तार से जानकारी दी गयी. साथ ही अस्पतालों में आने वाले रोगियों को तंबाकू सेवन के दुष्परिणामों के विषय में जागरूक करने के लिए स्कूली बच्चों ने अस्पताल में आने वाले विभिन्न मरीज़ों एवं आगुन्तकों को बैनर और पोस्टर के माध्यम से जागरूक किया. इससे अस्पताल में आने वाले 25 से 30 मरीजों ने अपनी इच्छानुसार तम्बाकू सेवन से होने वाली विभिन्न समस्याओं के बारे में चिकित्सकों से सलाह भी लिया. सदर हॉस्पिटल के साथ साथ ज़िले के सभी पी एच सी एवं सरकारी स्कूल मे भी संगोस्थि का आयोजन किया गया जहाँ बीड़ी तम्बाकू के दुष्परिणाम के बारे मे बताया गया। सदर अस्पताल मे इस अवसर पर अपर उप-अधीक्षक सह सहायक अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी गैर संचारी रोग डा. महादेव चौधरी ने बताया कि नशा जिनके भी जीवन से जुड़ता है उस इंसान को ना सिर्फ शारीरिक तौर पर बल्कि मानसिक तौर पर भी खोखला कर देता है. ऐसे मरीज़ों को दवा से ज्यादा बेहतर परामर्श की जरूरत होती है. उन्होंने बताया कि तम्बाकू सेवन से निजात पाने के लिए जीवन शैली में परिवर्तन एवं सकारात्मक सोच की बेहद जरूरत है. उन्होंने तंबाकू से स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्परिणाम पर परामर्श देते हुए बताया की नशा करने के कारण दिल को उतनी मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल पाता है जितनी उसे जरूरत होती है. साथ ही तम्बाकू ब्लड प्रेशर को भी बढ़ाता है जिससे दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है. इससे रक्त वाहिनियों में खून के थक्के जम जाते हैं जो हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और स्ट्रोक का एक प्रमुख कारण है. इससे रक्त वाहिनियों को भीतर से नुकसान पहुँचता है एवं हृदय की अंदरूनी रक्त वाहिनियां भी इससे बुरी तरह प्रभावित होती हैं. इस दौरान तम्बाकू सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी. यह बताया गया कि तम्बाकू में निकोटिन की अधिकता होती है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है. इससे ही व्यक्ति नशे का आदी बनाता है. साथ में इसके प्रभाव से कई प्रकार के कैंसर का जन्म का जन्म होता है जिसमें फेफड़े एवं मुँह के कैंसर की संख्या सबसे अधिक होती है. तम्बाकू में मौजूद निकोटिन के प्रभाव के चलते व्यक्ति में भूख एवं प्यास की कमी देखी गयी है. इसके अधिक सेवन से मानसिक अक्षमता भी बढ़ जाती है. डॉ चौधरी ने बताया कि सक्रिय ध्रूमपान की ही तरह निष्क्रिय ध्रूमपान भी स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है. ध्रूमपान करने से फैलने वाले धुएं की चपेट में आने से भी खून का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, पेट का कैंसर, आँतों का कैंसर एवं साईनस कैंसर हो सकता है. कि टोबैको इंटरनेशनल इनीसीएटिव द्वारा प्रस्तुत किए आँकड़ों के अनुसार देश भर में लगभग 27.5 करोड़ लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं जिसके कारण लगभग 9 लाख लोग प्रतिवर्ष कैंसर से ग्रसित होते हैं. साथ ही 13 से 15 वर्ष के 22 प्रतिशत बच्चे घर में होने वाले ध्रूमपान के धुएँ से एवं 13 से 15 वर्ष के 37 प्रतिशत बच्चे सार्वजनिक स्थानों पर फ़ैलने वाले धुओं से प्रभावित एवं बीमार हो रहे हैं. इस अवसर पर नशा मुक्ति विभाग से डॉ राजेश कुमार , एएनएम नीलम कुमारी, अभिषेक कुमार, पंकज कुमार के साथ एएनएम स्कूल के विद्यार्थी भी उपस्थित थे.
