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वर्ग 7 के छात्र द्वारा कविता पाठ का वाचन

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मेरा नाम रमन कुमार है । मैं पाटम्बर से बात कर रहा हूँ । सामुदायिक मीडिया रिपोर्टर शशांक पांडे मेरे घर आए और मुझे बताया कि एक कविता वर्षों से लिखी जा रही है । ना मैं घूमे घूमे बाटा बिगनो को तुम तुम तो साग धूप घासे पानी पत्थर पांडव आए कुछ और निकल भाग्य ना सब सुता है , देखो आगे क्या होता है , दोस्ती का रास्ता बताने के लिए , सब कुछ पटरी पर लाने के लिए , दुर्योधन को उन पांडवों को एक संदेश भेजें जो वन्हस्तीनापुर आए हैं ताकि सुयोधन को भयानक विद्वांस को बचाने के लिए राजी किया जा सके । न्याय अगर यह ढाई है , लेकिन अगर इसमें कोई बाधा है , तो केवल पांच ग्राम दें । अति से खाएंगे , परिवार पर हसी से लिए लिए लिए दुर्योधन , वह भी अतिश समाज के लेना देना के लेनाका उल्लाटे हरि को बंदते नहीं चला ।

मेरा नाम उत्सव कुमार है । मैं पथमबट से बोल रहा हूँ । सामुदायिक मीडिया रिपोर्टर आदिकांत पांडे मेरे पास आए । उन्होंने मुझसे एक कविता कही कि मुझे भी हिमालय की चोटी पर चढ़ना चाहिए । हमें शिखर पर एक नई छवि बनानी है , हमारी गणनाओं में उच्च की भावना उच्च है , कल हमारे आंतरिक स्वर्ग में उच्च है , कल हमारे जीवन के सपनों में उच्च है , साहस की छाती उच्च है । नीतनित पहाड़ की चट्टानों से चट्टानों से टकराकर आगे बढ़ती है , पर्वतारोही माझे की चोटी पर चढ़ते हैं और फिर ऊपर की ओर चढ़ते हैं , पहाड़ों का अंत लेकिन अभिमन्यु के अंत ने संघर्षों का अंत कर दिया ।

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