मेरा नाम उत्सव कुमार है । मैं पथमबट से बोल रहा हूँ । सामुदायिक मीडिया रिपोर्टर आदिकांत पांडे मेरे पास आए । उन्होंने मुझसे एक कविता कही कि मुझे भी हिमालय की चोटी पर चढ़ना चाहिए । हमें शिखर पर एक नई छवि बनानी है , हमारी गणनाओं में उच्च की भावना उच्च है , कल हमारे आंतरिक स्वर्ग में उच्च है , कल हमारे जीवन के सपनों में उच्च है , साहस की छाती उच्च है । नीतनित पहाड़ की चट्टानों से चट्टानों से टकराकर आगे बढ़ती है , पर्वतारोही माझे की चोटी पर चढ़ते हैं और फिर ऊपर की ओर चढ़ते हैं , पहाड़ों का अंत लेकिन अभिमन्यु के अंत ने संघर्षों का अंत कर दिया ।
