कृषि कार्य करने वाले ट्रैक्टर से ओवरलोडिंग मोरंग की ढ़ुलाई का काम धड़ल्ले से चल रहा है। सैकड़ों ट्रैक्टर इस काम में लगे हुए हैं, लेकिन आज तक आरटीओ द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है । इसके साथ - साथ सड़क हादसों में भी वृद्धि हुई है

Transcript Unavailable.

जनपद प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र ग्राम सभा पढ़वा नसीरपुर की रहने वाली सुशीला देवी पत्नी राजपति बिंद अत्यंत गरीब महिला है, जिसको आज तक किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिला है, जिसके पास कोई भी बाहरी आमदनी नहीं ,सुशीला के पास चार लड़की है, एक लड़का है, सुशीला देवी अपने गांव में ही मे नहर करके अपना व अपने परिवार का पालन पोषण करती है, सुशीला देवी के पास रहने के लिये कोई घर मकान नही है, घांस फूंस के बने छप्पर में अपने बच्चों के साथ रहती है, जिसकी दयनीय हालत बहुत डाबा डोल है, लेकिन उसके ऊपर किसी भी प्रतिनिधि और अधिकारी का ध्यान केन्द्रित नहीं पाया है, जो बहुत र्दुभाग्य पूर्ण है,

मैं , शैलेंद्र प्रताप सिंह , मोबाइल वडानी में आप सभी का स्वागत करता हूं । आपको बता दें कि एक स्कूल है , अदाब स्कूल , और वह भी एक प्राथमिक स्कूल , जहाँ उसके सामने की ईंट की दीवार पूरी तरह से टूट गई है । और अब एक जीर्ण - शीर्ण इमारत में पढ़ने आने वाले युवाओं के सामने की सड़कों से पता चलता है कि यहाँ जो खुश है वह यह है कि परिस्थितियाँ सामान्य नहीं हैं और छोटे बच्चे भी इतना नहीं समझते हैं । इस फाइल में जो तस्वीरें हैं , उनसे पता चलता है कि जब साहब शिक्षक के मंदिर के पास की सड़क ऐसी स्थिति में होती है , तो गांव के मुखिया इस बात पर ध्यान नहीं देते कि गांव की सड़कों का क्या होगा । अगर आपको गुस्सा आता है , तो गाँव में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर शिक्षा के मंदिर के पास की सड़कों या सड़कों की हालत इतनी खराब है , तो सोचिए कि कहीं और की सड़कों की हालत क्या होगी या उन पर कैसे काम किया जाएगा , तो यही मुद्दा है । आखिरकार , युवाओं को वहां की एक छोटी सी सड़क भी नहीं मिल पा रही है , तो उनका भविष्य कैसे बनेगा या उनका भविष्य कैसे चमकेगा और ये तस्वीरें विकास खंड बाउरा के सरज जमुहारी प्राथमिक विद्यालय की हैं । यह पंगुलापुर में है जहां स्कूल के गेट के पास पक्की सड़क से बनी खाई पूरी तरह से टूट गई है , न तो ग्राम प्रधान और न ही प्रधानाध्यापक इस पर ध्यान दे रहे हैं । किसी दिन कोई बच्चा गिर सकता है और घायल हो सकता है या गाँव वालों को चोट लग सकती है । जो लोग इस पर भी आते - जाते हैं और वे घायल हो सकते हैं , तो कब उम्मीद होगी कि यह सड़क बनेगी और नौ साल के बच्चे जो ठीक हैं या पढ़ाई के लिए जाते हैं , वे कब उनके भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता बनेंगे ?

मैं , शैलेंद्र तपा सिंह , मोबाइल वडनी में आप सभी का स्वागत करता हूं । आपको बता दें कि टरमैक पर बनाई गई यह पलाई बिना लुढ़की हुई है और खतरनाक मोड़ पर है , सड़क के तीन किनारे हैं , लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार । यहां पुलिया टूट जाती हैं और पुल पर रेलिंग क्यों नहीं है क्योंकि देर रात तक यह दुर्घटना का कारण बन सकता है और मौत का कारण बन सकता है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोग इससे गुजरते हैं कि क्या यह ग्राम प्रधान है या जिम्मेदार अधिकारी किसी भी काम के लिए गांव आते हैं । वे इस रास्ते से गुजरते हैं लेकिन वे इसे नहीं देखते हैं , तो क्या कारण है , आखिरकार , गाँव वालों का जीवन इतना सस्ता क्यों हो गया है या इतना सस्ता क्यों कर दिया गया है , तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि गाँव का विकास आखिरकार कैसे होगा और यह निराशाजनक विकास क्या है ? पहिये दिखाई दे रहे हैं , वे आखिरकार गाँव में कब जागेंगे और उठेंगे और दूर से दिखाई देंगे और गाँव वालों में एक उम्मीद पैदा होगी कि सतत विकास का पहिया लगातार घूम रहा है और हमारा जीवन भी बदल रहा है या बदलने वाला है । लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह स्थिति कब पैदा होगी और ये परिस्थितियाँ कब बदलेंगी और आम लोग और ग्रामीण कब खुश होंगे और उनकी उम्मीद कब बढ़ेगी और खुद को दिखा पाएगी ? कि हाँ , हमारे गाँव में कुछ हो रहा है और गाँव का विकास लगातार बढ़ रहा है । घूर्णन चक्र बताएगा कि साहब हमारे लोगों का गाँव है जो अब चमक गया है , लेकिन ये तस्वीरें जो बहुत धरती को चकनाचूर कर रही हैं , यह भी बहुत कुछ बताती हैं कि साहब सब कुछ बदल रहे हैं ।

Transcript Unavailable.

मैं , शैलेंद्र प्रताप सिंह , मोबाइल वाड़ी में आप सभी का स्वागत करता हूं । मैं आपको बताऊंगा कि गांव में हो या गलियों में या बाजार में , सड़कें हैं , सड़कों पर लगे नल का पानी सड़कों पर बह रहा है और जिसके कारण वहां लेकिन बड़े - बड़े गड्ढे बन रहे हैं , सड़कें टूट रही हैं , घर के सामने या दुकान के सामने सड़कें टूट रही हैं , विकास की नई तस्वीरें दिखा रही हैं कि गाँव में किस तरह का विकास किया जा रहा है और उस पर कितना पैसा खर्च किया जा रहा है , इसलिए वे टिकाऊ नहीं हैं और कितना ? अगर यह थोपा नहीं जाता है कि यह टिकाऊ हो जाता है , तो ये सभी तस्वीरें दर्शाती हैं कि विकास के नाम पर जो विकास के नाम पर किया जाता है , वह बहुत किया जाता है , लेकिन जो धोखा बाद में किया जाता है वह विनाश में बदल जाता है या जो तस्वीर विकास के बीच में होती है , वह मांगरौरा के सकरा बाजार को अवरुद्ध कर देती है । तस्वीर यह है कि दुकान का अगला हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा है और साथ ही सड़क के किनारे गड्ढा पानी से भरा हुआ है , छोटा गड्ढा भरा हुआ है , उसका पानी सड़कों पर बह रहा है और इस बाजार में वह सुविधा नहीं है जो अन्य बाजारों में है । यह छोटा है , लेकिन इसे अभी तक अपने विकास या इसकी संबंधित जरूरतों के लिए आवश्यक अन्य सहायता नहीं मिली है । रात में उच्च मास्क की व्यवस्था करने की कोई सुविधा नहीं है । और यहाँ जो सड़कें हैं वे टूटी हुई और गड्ढों से भरी हुई हैं , चारों ओर एक छोटा सा बाजार है , लोग किसी न किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं , इसलिए सड़कों के किनारे बनने वाला लड़के का पानी सड़कों पर आ रहा है , जिससे सड़कें गड्ढों से भरी हुई हैं , इसलिए यहाँ सब कुछ वही है जो वह है । अपनी बुनियादी सुविधाओं से वंचित और स्थित इस बाजार को अंततः अपनी मूल सुविधा या अपना मूल नाम जो है या मूल स्थान जो है , मिल जाएगा ।

मैं , शैलेंद्र प्रताप सिंह , मोबाइल वडनी में आप सभी का स्वागत करता हूं । आपको बता दें कि गांव की पक्की सड़क धूल में बदल गई है । उस सड़क के एक तरफ गड्ढे हैं और दूसरी तरफ धूल है । आज बहुत विकास हुआ है । कई साल पहले बनी यह सड़क हमारे लिए बहुत उम्मीद लेकर आई थी और यह उम्मीद कुछ साल तक बनी रही , लेकिन आज यह उम्मीद धराशायी हो गई है क्योंकि यह सड़क पक्की थी जो आज टूट गई है । साहब की इस सड़क की क्या स्थिति है ? आज यह दिखाई नहीं दे रहा है । उस पर धूल है और गड्ढे हैं , तो हमारा क्या दोष है ? अगर उनसे पूछने वाला कोई नहीं है , तो हमसे गाँव में बस - रहित स्थिति के बारे में कौन पूछेगा , जहाँ दशकों से सड़कें बनाई गई हैं । लेकिन ऐसा लगता है कि सड़कों की स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है । सड़कों की हालत खस्ता है । आम जनता परेशान है । उनके घरों में घूमने का यही एकमात्र तरीका है । लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है । आखिर यह कैसे होगा कि हम गरीब लोगों के आने - जाने की यही एकमात्र उम्मीद है , लेकिन जब बारिश आती है , तो इसकी स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि यह बहुत दूर हो जाती है कि इसका जन्म नहीं हो सकता , आखिर अन्य जिम्मेदार लोग इस पर ध्यान क्यों नहीं देते , हमारी बात क्यों नहीं सुनी जाती ? हम लोगों की यह स्थिति कब तक बनी रहेगी , हमारी बात क्यों नहीं सुनी जाती , क्या हमें सिर्फ अपनी खुशी दिखाने के लिए गरीबों को वोट देने के लिए कहा जाता है या उनके साथ विकास के नाम पर धोखा किया जाता है ।

Transcript Unavailable.

मैं शैलेंद्र प्रताप सिंह मोबाइल वाड़ी में आप सभी का स्वागत करता हूं । आपको बता दें कि गांव में बना या लगाया गया सरकारी हैंडपंप टूटा हुआ है , जो बंद पड़ा है और चलने की स्थिति में नहीं है । प्यार में डूबा यह सरकारी हैंडपंप अपनी दुर्दशा बता रहा है कि साहब गांव में पानी की लत से जूझ रहे लोगों के लिए मेरी व्यवस्था की गई थी , लेकिन आज मैं टूटा हुआ और अपंग हूं , तो मैं दूसरों की प्यास कैसे बुझाऊंगा ? बाया कर दो और बहुत सारे हमले किए जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं होता है या तस्वीर प्रतापगढ़ के एक विकास खंड मंगरौरा के सकरा बाजार की है , जहां सकरा बाजार में घरों या दुकानों के पास सरकारी हैंडपेपर लगाए जाते हैं । यह क्षतिग्रस्त है , इसमें उसके हाथ नहीं टूटे हैं , यह बंद है , इसकी मरम्मत भी नहीं की गई है , ग्राम प्रधान को भी इसके बारे में सूचित किया गया है , चाहे वह ग्रामीण हो या बाजार का व्यक्ति , लेकिन वे कहते हैं कि ग्राम प्रधान जो कहा जा रहा है उसे सुनने के लिए तैयार नहीं है । तो जैसे लोगों के साथ हमारी दुश्मनी है और हम लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देते हैं , तो मुझे बताइए , श्रीमान , हम कहाँ जाएँ ? हम सुबह से पानी की कमी से जूझ रहे हैं । आप क्यों नहीं सुनते , अभी ग्राम प्रधान हमारे लिए कोई काम नहीं करता है , इसलिए आखिरकार , हम किसके पास जाते हैं और किसके पास जाते हैं , हम अपनी आपात स्थितियों का वर्णन करते हैं और उन्हें भी बताते हैं ताकि जो भी जिम्मेदार हो वह कहे कि हां ठीक हो जाएगा , लेकिन उन्हें ठीक होने में महीनों लगेंगे । लेकिन इसे अभी तक ठीक नहीं किया गया है और न ही ऐसा हुआ है , इसलिए सभी सुविधाओं के होने के बावजूद गांव में विकास की जो हवा चलनी चाहिए थी , वह कहीं न कहीं गलत रास्ते पर चली गई है और आम जनता से लेकर जनता तक जो परेशान हैं , जिम्मेदार लोग अब अपने हाथों में हैं ।