कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की स्वीकारोकती के बाद सवाल उठता है, कि भारत की जांच एजेंसियां क्या कर रही थीं? इतनी जल्दबाजी मंजूरी देने के क्या कारण था, क्या उन्होंने किसी दवाब का सामना करना पड़ रहा था, या फिर केवल भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला है। जिसके लिए फार्मा कंपनियां अक्सर कटघरे में रहती हैं? मसला केवल कोविशील्ड का नहीं है, फार्मा कंपनियों को लेकर अक्सर शिकायतें आती रहती हैं, उसके बाद भी जांच एजेंसियां कोई ठोस कारवाई क्यों नहीं करती हैं?

कोई भी राजनीतिक दल हो उसके प्रमुख लोगों को जेल में डाल देने से समान अवसर कैसे हो गये, या फिर चुनाव के समय किसी भी दल के बैंक खातों को फ्रीज कर देने के बाद कैसी समानता? आसान शब्दों में कहें तो यह अधिनायकवाद है, जहां शासन और सत्ता का हर अंग और कर्तव्य केवल एक व्यक्ति, एक दल, एक विचारधारा, तक सीमित हो जाता है। और उसका समर्थन करने वालों को केवल सत्ता ही सर्वोपरी लगती है। इसको लागू करने वाला दल देश, देशभक्ति के नाम पर सबको एक ही डंडे से हांकता है, और मानता है कि जो वह कर रहा है सही है।

अमेठी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की हालत खराब है , ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें गड्ढों में बदल रही हैं और उन पर गंदा पानी भरा हुआ है । भैरों पर रिचौरी संपर्क सड़क की हालत खराब है , लेकिन चार साल में यह सड़क गड्ढों में बदल गई है । इ

नमस्कार , आप अमेठी शहर के पास रामनाथपुर गांव में इंटरलॉकिंग पर एम . पी . मिश्रा को मोबाइल वाणी अमेठी सुन रहे हैं । बिजली के खंभे को रोकने के लिए स्टेटल लगाया गया है , उस स्टेटर के कारण किसी भी दुर्घटना को कम किया जा सकता है । गाँव के अधिकांश लोग इस सड़क पर बहुत तेज हैं । ग्रामीणों अंजनी मिश्रा और अन्य लोगों ने कहा कि तार को कई बार हटाया गया था ।

अमेठी ,आदर्श नगर पंचायत ,कस्बे के वार्ड नंबर 12 में गन्दगी का आलम यह है कि वार्ड में प्रवेश करते ही दुर्गंध से सामना होता है

अमेठी,गांव में सफाई व्यवस्था ध्वस्त हो गई है ,नाली चोक कर गई है दुर्गंध से ग्रामीण परेशान हैं

अमेठी ,सांसद स्मृति ईरानी के घर को जाने वाले मार्ग की हालत खराब है लोगो को आने जाने में परेशानी हो रही है

एडीआर संस्था ने अपनी एक और रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में राजनीतिक पार्टियों की कमाई और खर्च का उल्लेख है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे राजनीतिक पार्टियां अपने विस्तार और सत्ता में बने रहने के लिए बड़े पैमाने पर खर्च करती हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे बड़े सत्ता धारी दल ने बीते वित्तीय वर्ष में बेहिसाब कमाई की और इसी तरह खर्च भी किया। इस रिपोर्ट में 6 पार्टियों की आय और व्यय के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, सीपीआई एम और बीएसपी और एनपीईपी शामिल हैं। दोस्तों, *---- आपको क्या लगता है, कि चुनाव लडने पर केवल राजनीतिक दलों की महत्ता कितनी जरूरी है, या फिर आम आदमी की भूमिका भी इसमें होनी चाहिए? *---- चुनाव आयोग द्वारा लगाई गई खर्च की सीमा के दायेंरें में राजनीतिक दलों को भी लाना चाहिए? *---- सक्रिय लोकतंत्र में आम जनता को केवल वोट देने तक ही क्यों महदूद रखा जाए?

ऊबड़ खाबड़ रोड पर चलने से लोग हो रहे हैं बीमार

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