साथियों , हर वर्ष की तरह आज 12 अगस्त को पूरे विश्व में मनाया जा रहा है अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य युवाओं से जुड़े मुद्दों को अंतराष्ट्रीय समुदाय के ध्यान में लाना और आज के वैश्विक समाज में भागिदार के रूप में युवाओं की क्षमता का जश्न मनाना है । इस दिन की स्थापना 1999 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया भर के युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी।अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल एक विशेष थीम पर मनाया जाता है, जिसके केंद्र में युवाओं को सशक्त करने के प्रयास होते हैं। इस वर्ष का थीम है : 'क्लिक से प्रगति तक : सतत विकास के लिए युवा डिजिटल मार्ग ' . युवा नई तकनीकों को अपनाने और सकारात्मक रूप से बदलाव लाने में सबसे आगे है। युवा विकास के लिए यह शक्तिशाली विषय डिजिटलीकरण और सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति के बीच महत्वपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करता है। साथियों, इस अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आप सभी युवाओं को मोबाइल वाणी के परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा धान की खेती में अजोला से क्या क्या लाभ होते हैं उसके बारे में जानकारी दे रहे हैं। विस्तारपूर्वक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें .

भारत जैसे देश में महिलाओं की स्थिति का थोड़ा सा अंदाजा इन आंकड़ों से भी लग सकता है। आजादी के महज चार सालों बाद साल 1951 में भारत की कुल साक्षरता दर केवल 18.3 फीसदी थी, इसमें से महिलाओं की साक्षरता दर 9 फीसदी से भी कम थी। वहीं, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के डाटा के अनुसार साल 2021 में देश की औसत साक्षरता दर 77.70 प्रतिशत थी जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 84.70 प्रतिशत, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 70.30 प्रतिशत थी। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि आजादी के बाद से अब तक महिलाओं की साक्षरता दर में वृद्धि हुई है। दोस्तों, *----- आपको क्या लगता है कि महिलाओं के प्रति हो रहे भेदभाव की क्या वजह हैं, "*----- महिलाओं के पास भी भूमि अधिकार हों! इस नज़रिए से हमारे कानूनों और नीतियों में आपको क्या कोई कमियां नज़र आती हैं? *----- महिलाओं को भूमि का अधिकार मिले , इसे हासिल करने के लिए हमारे कानूनों के नीतियों में ऐसे कौन से बदलाव होने चाहिए जिससे महिलाओं के लिए भूमि अधिकार पाना कुछ आसान बन सके?"

जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। आप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने और उन्हें सीखाने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाते है?

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी ने नेहा कुमारी से बातचीत की जिसमें उन्होंने जानकारी दी कि मीडिया महिलाओं से बात कर और वीडियो के द्वारा उन्हें जागरूक करते हैं

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी ने नेहा कुमारी से बातचीत की ,जिसमें उन्होंने जानकारी दी कि महिलाओं को अगर जमीन पर अधिकार मिला तो वो अपने और अपने बच्चों के भविष्य के लिए काम करेगी। पुरुष महिला को हक नहीं देना चाहते हैं की महिला कुछ गलत कदम उठा सकती है। लेकिन पुरुषों के पास हक़ होने पर वो भी इसका दुरूपयोग तो करते ही हैं। इसलिए महिलाओं को संपत्ति पर अधिकार मिलना ही चाहिए

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी जानकारी दे रही हैं कि महिलाओं के विकास और सम्मान, उनके प्रति होने वाली हिंसा में कमी लाने के लिए जरुरी है की महिलाओं को जागरूक किया जाए। इसके साथ ही अभिभावक को इस बात का ख्याल रखना चाहिए की वो अपने बच्चों की शादी सही उम्र में ही करें

बिहार राज्य के जिला औरंगाबाद से सलोनी कुमारी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से वंदना कुमारी से हुई। वंदना कुमारी यह बताना चाहती है कि महिलाओं के लिए समाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने में मीडिया और नागरिक समाज में मीडिया का बहुत बड़ा योगदान होता है। मीडिया पहले जनता का दुःख को समझता है। अगर उनका अधिकार नहीं है तो मीडिया उनको अधिकार दिलाने में मदद करता है। वह लोगों का वीडियो बनाता है और अपने चैनल पर डालता है उसके बाद जनता इसको देखते है और प्रभावित होते है और जागरूक होते है की नहीं उनके साथ गलत हुआ और उनका अधिकार है तो उनको अधिकार मिलना चाहिए।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी ने वंदना कुमारी से बातचीत की जिसमें उन्होंने जानकारी दी कि बाल विवाह पर रोक लगानी चाहिए और अभिभावक अपनी बेटियों को पढ़ने का अवसर दें और सही उम्र में ही उनकी शादी करें। इन सब बदलावों से महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा में कमी आएगी