बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी जानकारी दे रही हैं कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना जरुरी है। क्योंकि जानकारी के अभाव में कई बार महिलाओं का भविष्य बर्बाद हो जाता है। ऐसे लोगों के सम्पर्क में जरूर रहें जो महिलाओं के अधिकार के बारें में सही जानकारी रखते हैं

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी जानकारी दे रही हैं कि महिलाओं को भी भूमि पर अधिकार मिलना चाहिए। इससे वे ना केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगी बल्कि धीरे-धीरे कई बदलाव देखने को मिलेंगे। इन बदलावों से ना केवल महिलाओं का विकास होगा बल्कि समाज और देश में भी सकारात्मक प्रभाव नजर आएंगे

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी जानकारी दे रही हैं कि महिलाओं को अपने जमीन के लिए आगे बढ़ कर बात करनी चाहिए। अगर इस विषय पर जानकारी नहीं है, तो ऐसे लोगों के सम्पर्क में रहें जो आपको जानकारी के साथ ही अपना समर्थन भी दें। अपने अधिकार को पाने के लिए हर संभव प्रयास किये जाने चाहिए

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हर महिला को जागरूक करना चाहते हैं कि उन्हें अपनी जमीन का अधिकार मिल सकता है। ताकि वह अपने वित्त का अच्छी तरह से प्रबंधन कर सके। महिलाओं को भूमि अधिकार प्राप्त करने के लिए काम कर रहे सामाजिक संगठनों के लिए एक स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि लड़ाई पुरुषों के खिलाफ नहीं है। सत्तर के दशक से, भूमि का स्वामित्व महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन भारत में महिलाओं की भूमिहीनता पर लिंग-आधारित आंकड़ों की कमी है।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हम प्राचीन काल से ही सुन रहे हैं कि हर घर में पति का जमीन पर अधिकार होता है और पत्नी का नहीं। जब तक महिलाएं जागरूक नहीं होंगी, उन्हें भूमि का अधिकार नहीं मिलेगा। हर तरह से महिलाएं जागरूक होकर अपनी जमीन का अधिकार प्राप्त कर सकती हैं। वर्तमान में महिला सोसायटी के पास भूमि संपत्ति है। मताधिकार का हनन वास्तव में आधी आबादी या दुनिया के आधे हिस्से के लिए अवमानना है जो भारत में एक माँ, बहन और पत्नी या एक महिला किसान के रूप में दो गज भूमि और मुट्ठी भर संपत्ति का हकदार है।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भूमि पर पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का भी क्या अधिकार है और यह कैसा होना चाहिए। यह विचार कि भूमि पुरुषों के नाम पर होनी चाहिए और नौकरियां पुरुषों के नाम पर होनी चाहिए, संगठनात्मक व्यवस्था में बहुत गहराई से निहित है। महिलाओं की संख्या में वृद्धि के बावजूद, हर महिला के लिए जमीन का मालिक होना अभी भी समान नहीं है। अपनी संपत्ति के अधिकार को छोड़ दें आधी आबादी के लिए समान अधिकारों को महसूस करना एक जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य है। यह एक अधूरा मानवाधिकार संघर्ष है। महिला सशक्तिकरण की हर परिभाषा और प्रयास इस बात को स्वीकार किए बिना अधूरा है कि हर महिला को भूमि पर उतना ही अधिकार होना चाहिए जितना पुरुषों को।

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दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि जमीन पर हक पुरुषों के साथ साथ महिलाओं का भी जन्मसिद्ध अधिकार है? क्या आप इस अधिकार को पाना चाहती हैं? क्या हम महिलाओं को एक ऐसी ज़िंदगी जीना चाहती हैं, जहां सम्मान के साथ अपने खेतों में फसल उगा सकें? इन्ही सब सवालों और जबाबो के साथ साथ ढेर सारी जानकारियों के साथ आ रहा है आपके अपने मोबाइल वाणी पर एक नया कार्यक्रम जिसका नाम है "अपनी जमीन, अपनी आवाज" . अगर आपके पास इससे जुडी कोई बात है , तो हम तक ज़रूर पहुँचाएँ

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