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बिहार राज्य के औरंगाबाद ज़िला से कोमल ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाएं समृद्धि और उत्थान के महत्वपुर्ण अंग है। उनका सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक योगदान समृद्धि में मदद करता है और समाज को उनके सकारत्मक भूमि से लाभ होता है। परिवार संरचना में महिलाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महिलाओं को जमीनी अधिकार होना आवश्यक है क्योंकि आगे चल कर परिस्थिति अनुसार जमीन का इस्तेमाल कर सकते
बिहार राज्य के औरंगाबाद ज़िला से कोमल ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने के लिए उन्हें सशक्त बनाना चाहिए। 2 अगस्त 2023 को महिलाओं के भूमि अधिकारों पर काम किया जाने लगा। समाज सेवी संस्थाओं को उनके मानव अधिकार और सम्मान देनी चाहिए। उन्हें पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी ने बताया कि पिता या पति के जीवित रहते ही अगर औरत का नाम सम्पत्ति के कागजों में जोड़ दिया जाए तो समस्याओं से बचा जा सकता है। अगर कोई औरत विधवा हो जाती है तो सामाजिक नियमों के अनुसार एक महीने तक उन्हें घर के ही अंदर रहना पड़ता है और उन्हें काफी प्रताड़ना झेलना पड़ता है। उन्हें सम्पत्ति में हिस्सा भी नही दिया जाता है। महिलाओं को मजबूत और जागरूक होना होगा ,तभी वो भूमि का मालिकाना हक़ हासिल कर सकती है
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददातासलोनी कुमारी ने बताया कि इन दिनों ये सबसे अधिक कमजोर महिलाओं के साथ काम कर रही हैं ,क्योंकि केंद्रों से आने वाले पराली जल कर्मचारियों के दफ्तर में एक रिश्ता विकसित कर लिया है। इससे समय बचता है और ये एक दिन में ज्यादा लोगों की मदद कर पाती हैं। आज भी सरकारी कर्मचारी के साथ काम करना बहुत मुश्किल है। वे कई तरह के भने बनाते हैं.जैसे आज हमारे पास फार्म नही है, कभी कहते हैं मुहर नहीं है,इत्यादि। इन रवैयों से पूरी प्रक्रिया लम्बी हो जाती है और औरतों को भूमि का अधिकार मिलने में देरी हो जाती है। भूमि अधिकार प्रकिया में जैसे-जैसे समय गुजरता है महिलाएं टूट जाती हैं और भूमि अधिकार नही लेने का विचार करती है। लेकिन महिलाओं को भूमि हक़ दिलाने में सलोनी कोई कसर नही छोड़ेंगी और उन्हें जागरूक भी करेंगी। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सीमा देवी जानकारी दे रही हैं कि महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने का मतलब उन्हें सशक्त बनाना है। महिलाओं के अधिकार के लिए जरुरी हैं की उन्हें अपनी पसंद से शादी की आजादी, यौन हिंसा से मुक्त मत देने की आजादी, सार्वजनिक पद धारण करने की आजादी, कानूनी पेशे में प्रवेश करने की आजादी और पारिवारिक कानून के समान अधिकार देने की आजादी,समान वेतन की आजादी, स्वतंत्र शिक्षा प्राप्त करने की आजादी। ये सभी सामान्य हक़ महिलाओं को दिलाना जरुरी है। इन अधिकारों से ही महिला में आत्मविश्वास आयेगा और वो निडर हो कर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने में सक्षम होंगी
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शिवकुमारी देवी जानकारी दे रही हैं कि महिलाओं को भूमि अधिकार मिलना चाहिए। महिलाओं की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि परिवार की संरचना और देखभाल जैसे सभी चीज़ों में महिलाओं का योगदान रहता है। इसलिए भूमि अधिकार में भी उनकी भूमिका जरुरी है
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शिवकुमारी जानकारी दे रही हैं कि महिलाओं का सशक्त होना बहुत जरुरी है। महिलायें आत्मनिर्भर और सशक्त हो इसके लिए सरकार ने कई कार्य किये हैं। स्त्री शिक्षा को अनिवार्य किया। शादी की उम्र तय की, तलाक को कानूनी दर्जा दिया। महिलाओं के लिए ऐसी कई योजना चलाई जिससे की वो प्रशिक्षण ले कर रोजगार के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति और भविष्य को मजबूत कर सकें
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी जानकारी दे रही हैं कि महिलाओं को महिलाओं के भूमि अधिकार के मामले में अधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थति इसलिए हो जाती है। क्योंकि एक तो महिला अपने हक़ अधिकार के प्रति जागरूक नहीं हैं। अगर कई मामलों में महिला जानती भी हैं, तो इसके लिए आवाज नहीं उठाती। इसके पीछे कई कारण होते हैं। लेकिन अगर कोई महिला दृढ़ संकल्प के साथ अपने भू स्वामित्व के लिए प्रयास करे, तो वो कभी असफल नहीं होगी। महिलाओं को गरिमा सम्मान जैसी भावनाओं से आगे आ कर सोचने और अपने हक़ को पाने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता है
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी जानकारी दे रही हैं कि भूमि स्वामित्व, महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। लेकिन भारत में महिलाओं की भूमि-हीनता उन्हें कई तरह से कमजोर बना रहा है। एक महिला की पहचान उभर कर तब ही आती है, जब वो भूमि पर अपना स्वामित्व रखती है। गांव के लोग उसे हर मामले में शामिल करते हैं। अगर महिला के पास भूमि है, तो वह अपनी मर्जी से उस पर खेती कर या उसका इस्तेमाल कर अपने बच्चे को पढ़ा सकती है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो कर आवाज उठानी जरुरी है
