महिलाओं के मामले में, भूमि अधिकारों की दृष्टि से कई चुनौतियाँ होती हैं। भारतीय समाज में, महिलाएं अक्सर अपने परिवार और समुदाय के साथ रहती हैं और उन्हें भूमि अधिकारों की पहुँच से दूर रखा जाता है। सामाजिक प्रतिष्ठा, संस्कृति और कानूनी प्रवृत्तियाँ ऐसे होती हैं जो महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर सकती हैं। इसके अलावा, ऐसे कई सामाजिक तौर तरीके और मान्यताएँ हैं जो महिलाओं को भूमि के मामलों में उनके अधिकारों की प्राप्ति में अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- महिलाओं के लिए भूमि अधिकारों क्यों ज़रूरी है और उसका क्या महत्व हैं? *----- महिलाओं को भूमि अधिकारों तक पहुंचने में कौन सी बाधाएं आती हैं? *----- महिलाओं के सशक्त होने के लिए समाज का उनके साथ खड़ा होना ज़रूरी है लेकिन ऐसा किस तरह हो सकता है? *----- आपके हिसाब से महिलाओं के सशक्त होने से समाज में किस तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं?

उत्तप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे श्रोताओ से बात किया उन्होंने महिला जमीन अधिकार के बारे में अपनी अपनी राय दी

इस भीषण गर्मी से बचना है तो इन बातों का हमेशा ध्यान रखना है। नियमित रूप से पानी पीना, भोजन में पौष्टिक तत्व और ठंडी चीज़ों को शामिल करना और हल्का भोजन करना। अगर आपने इस भीषण गर्मी से बचने के लिए कोई खास तरीका अपनाया है या फिर अपने भोजन में किसी तरह की कोई खास चीजें शामिल की हैं, जिससे कि इस भीषण गर्मी में कुछ राहत मिल सके, तो अपने ये उपाय सभी के साथ जरूर बांटें।

उत्तप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से अलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि पैतृक संपत्ति में समान हिस्से के लिए बेटियों के कानूनी अधिकारों में संशोधन किया। यह अधिकार संविधान में दो हजार पाँच से पहले उन्नीस सौ छप्पन में दिया गया था, लेकिन इसे पूरा किया गया। संपत्ति पर दावों और अधिकारों के प्रावधान के लिए इस कानून को उन्नीस सौ पचास में विस्तृत किया गया था। यह उन्नीस सौ छप्पन में बनाया गया था, लेकिन इसके अनुसार, पिता की संपत्ति पर बेटों का उतना ही अधिकार है जितना बेटों का। अर्थात्, यदि दो बेटों और एक बेटी के पास तीन बीघा जमीन है, तो एक बीघा पर तीनों का अधिकार इस प्रकार हैः उन्नीस सौ छप्पन में संविधान बनाया गया था कि एक बेटी का उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है जो मैंने पिता को स्वयं सौंपी गई संपत्ति से अर्जित की है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी शादीशुदा है या नहीं या नहीं, भले ही वह शादीशुदा न हो, यह पिता का समन है।

उत्तप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि महिलाओं और पुरुषों में लैंगिक असमानता का भेदभाव देखा जाता है, हालांकि सरकार का कहना है कि महिलाओं के लिए भी पूरी व्यवस्था की गई है, लेकिन ऐसा अक्सर देखा जाता है। कहा जाता है कि महिलाओं की आधी से आधी शिक्षा के अभाव में आज भी लोगों को शिक्षा की कमी के कारण जानकारी नहीं मिल पा रही है और वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम हैं। वे उन खर्चों को वहन करने में असमर्थ हैं जिनके कारण वे कामकाजी महिलाओं के रूप में रह जाती हैं।

उत्तप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि बढ़ती धूप और गर्मी के पीछे क्या है जिसके कारण लोग बढ़ती गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। कुछ लोगों की जान भी जा रही है। आने वाले समय में लोगों को हर साल एक पेड़ लगाना चाहिए उन्हें क्या चाहिए हर साल एक पेड़ न लगाएं हर साल बारिश के मौसम में अधिक से अधिक गाँव में पौधे लगाए जाते हैं, देखा जाता है कि इस समय बगीचे खत्म हो गए हैं, पेड़ भी काटे जाते हैं, फिर लोग उस पर ध्यान नहीं देंगे, फिर गर्मी बढ़ेगी। ज्यादा प्रदूषण के कारण बारिश नहीं हो रही है हां, लॉकडाउन में देखा गया कि वाहन कम चल रहे थे तो उस समय बारिश ज्यादा हो रही थी और इस समय वाहन ज्यादा चल रहे हैं तो बारिश नहीं हो रही है प्रदूषण कम है, थोड़ा प्रदूषण भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। ऐसे पेड़ लगाएं, जिससे वृक्षारोपण से गर्मी से राहत मिलेगी और प्रदूषण मुक्त भी होगा और नहीं तो लोगों को भी राहत मिलेगी।

उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर जिला से अलोक श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अधिकार हिंसा से मुक्त होने के लिए नंबर एक शारीरिक अखंडता के अधिकार की तरह हैं। शारीरिक अखंडता हिंसा से मुक्त होने और अपने शरीर पर चुनाव करने में पाई जाती है। यह एक अधिकार है। महिलाओं के लिए एक सामाजिक अधिकार है। सामाजिक अधिकारों जैसे स्कूल जाना, सार्वजनिक जीवन में भाग लेना, सार्वजनिक का अर्थ है समाज में जागरूकता अभियान। या किसी भी समाज सेवा कार्य में भाग लेने का यह अधिकार महिलाओं को दिया गया है। तीसरा आर्थिक अधिकार है। आर्थिक अधिकारों में संपत्ति का स्वामित्व शामिल है। अपनी पसंद की नौकरी होना और उसके लिए समान रूप से भुगतान किया जाना और महिलाओं को राजनीति में भी अधिकार दिए गए हैं। विकल्प के रूप में ये तीन अधिकार मुख्य रूप से दिए गए हैं।

उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से अलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि महिलाओं को अपने माँ से पहला ज्ञान और संस्कार मिलता है। हर महिला का मान सम्मान करना हमारा पहला अधिकार है

मानव जीवन में योग का बहुत बड़ा योगदान है। योग से न सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि नियमित योग करने से कई तरह की बीमरियों से निजात भी मिलती है। पहली बार 21 जून 2015 को योग दिवस मनाया गया और तब से लेकर हर वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। इस साल यानि 2024 का थीम है " स्वयं और समाज के लिए योग". योग दिवस को बड़े स्तर पर मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगों को योग के जरिये स्वस्थ और निरोगी जीवन के प्रति जागरूक करना। तो ,साथियों आइए आज योग दिवस पर हम खुद से वादा करें कि जीवन में जितनी भी व्यस्तता और चुनौतियां हो, अपने दैनिक जीवन में योग को शामिल करेंगे और जीवन को उत्साह से भर कर शरीर, मन एवं आत्मा को स्वस्थ रखेंगे।

उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि हमारे समाज में लैंगिक असमानता अभी भी बहुत प्रचलित है। अक्सर यह देखा जाता है कि लड़कियों को लोगों द्वारा नहीं पढ़ाया जाता है। सरकार का कहना है कि लैंगिक असमानता समाप्त हो गई है और महिलाओं को भी पूरा अधिकार मिला है, लेकिन आज भी समाज में यह भेदभाव व्याप्त है। यह भी देखा गया है कि महिलाएं अभी भी शिक्षा के क्षेत्र में बहुत पीछे हैं।