उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब महिला आर्थिक रूप से सुरक्षित होती है तो वो स्वास्थ्य पर भी ध्यान दे पाती है। जमीन में नाम रहने से महिला आर्थिक रूप से सुरक्षित होगी और अपने बारे में सोच पाएगी

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब महिलाओं के नाम जमीन होती है तो घर में महिलाओं की आवाज़ ज़्यादा सुनी जाती है। घर के हर के फैसले में महिलाओं की भूमिका बढ़ती है। ये सिर्फ कागज़ का अधिकार नहीं बल्कि निर्णय लेने की शक्ति भी है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि पति की मृत्यु के बाद विधवा बहु अपने हिस्से के लिए ससुर की संपत्ति में दावा कर सकती है। क्योंकि मृत्यु के बाद उसके कानूनन वारिश में विधवा पत्नी और उसके बच्चे शामिल होते हैं

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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से 44 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि पट्टे की जमीन के लिए प्रधान से यह लिखवाना होगा कि व्यक्ति के पास जमीन नहीं है ,इसके बाद सम्बंधित लेखपाल से मिलकर एक ऑनलाइन एप्लीकेशन भी देना होता है। जिसपर लेखपाल अपनी रिपोर्ट लगाते है और यह सक्षम अधिकारी के पास जाता है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद तहसील से जानकारी होती है। इस प्रकार पत्नी को जमीन मिल सकता है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि सबुर मिशा ने बताया कि इनके पिता द्वारा इन्हें जमीन मिला है। इससे वो खुश है। साथ ही इन्हे किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि साउघाट प्रखंड निवासी नाज़मा ने बताया कि इनके पति ने नाजमा के नाम से ज़मीन लिया ,खेत लिया ,रजिस्ट्री करवाने में पैसे भी कम लगे। बस एक समस्या आ रही है कि केवाईसी भी अपडेट है ,सब चीज़ सही रहने के बावजूद किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से उम्र 44 विजय कुमार चौधरी कहते हैं कि भारत में महिलाओं को दो हज़ार पाँच हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के द्वारा पिता की संपत्ति में बेटियों को भी कानून अधिकार बन गया। विवाहित हो या अविवाहित बेटी माँ पिता की जमीन की सामान हिस्सेदार बनती है। इसके अलावा भी महिलाओं के नाम जमीन खरीदी जाती है, तो सरकार स्टाम्प में छूट देती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि पैतृिक संपति में दो हजार पांच कानून के अनुसार बेटियों को भी हक़ दिया गया है क्योंकि जन्म से ही बेटियां जमीन की सहभागीदार है और अपने माता पिता की जमीन और घर में वो अपना हिस्सा मांग सकती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भूमि पर महिलाओं का अधिकार होने से अनेक प्रकार के लाभ होते है। जैसे की उनका आय का स्रोत भी मिल जाता है। अगर ज़रूरत पड़ने पर उनको कोई दिक्कत है, तो जमीन के जरिए बैंक से लोन भी ले सकती हैं। वो अपना व्यवसाय शुरू कर सकती है। इससे उनका मान सम्मान बढ़ सकता है। महिलाओं के पास अगर भूमि के अधिकार है, तो परिवार में उनका मान सम्मान या कोई निणय लेने में उनको उनकी भूमिका बढ़ जाती है। भूमि का स्वामित्व उन्हें समाज में सम्मान और नई पहचान देता है। उनका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। उनके साथ घरेलु हिंसा भी नहीं होता है