उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे एक श्रोता से हुई। ये कहते है कि इनके क्षेत्र में न ही पेट्रोल की समस्या हो रही है न ही रसोई गैस सिलिंडर की समस्या हो रही है। बस इस सब को लेने के लिए थोड़ी मेहनत करनी होगी
गांव आजीविका और हम के इस कड़ी में हम हमारे विशेषज्ञ जीवदास साहू द्वारा जानेंगे बैगन की अच्छी फसल के लिए कौन कौन से खाद का प्रयोग कर सकते हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
उत्तर प्रदेश राज्य के बस्ती जिला से रमजान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से मोहम्मद फरहान से हुई। मोहम्मद फरहान यह बताना चाहते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कमी से देश में बहुत प्रभाव पड़ेगा और भूखमरी फ़ैल जायेगा। लोगों को एक जगह से दूसरे जगह पैदल जाना पड़ेगा।इसके कारण घर में विवाद होगा। युद्ध के कारण लगता नहीं है कि इस समस्या से निजात मिलेगा। सरकार को सोच समझ कर इस समस्या का उपाय निकालना चाहिए
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू परवल में फूल हो रहे है पर फल नहीं लग रहे की जानकारी दे रहे हैं ।
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्होने मोबाइल वाणी में सुना कि महिलाओं को जमीन में मालिकाना हक़ मिलना चाहिए जिसके बाद इन्हे विचार आया कि इनके नाम से भी एक जमीन होनी चाहिए। आशा की शादी को दो वर्ष हुए थे। इनके पति निजी स्कूल में शिक्षक थे। ये अपनी परिवार के साथ किसी तरह गुज़र बसर कर रही थी। मोबाइल वाणी का कार्यक्रम सुनने के बाद इन्हे अहसास हुआ कि अगर जमीन रहे तो उसे स्थायी पूंजी के रूप में इस्तेमाल कर सकते है। ये विचार आशा ने अपने पति के साथ साझा किया लेकिन इनके पति ने कहा कि उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वो आशा के नाम एक जमीन ले सके। और कहा कि वो इस बारे में एक बार अपने पिता से बात करे क्योंकि पिता के जमीन में बेटी का हिस्सा होता है । आशा ने सोचा कि इससे भाई बहन में दरार आ सकती है इसलिए उन्होंने इसकी बात अपने पिता से नहीं की। कुछ दिन बाद इनके पति की बीमारी के कारण काम छूट गया। घर खर्च चलना मुश्किल हो गया। जिसके बाद आशा ने अपने पिता से जमीन के विषय बात की और उनके पिता ने कहा कि हिस्सा तो बेटा को मिलता है। लेकिन आशा की पूरी परेशानी सुन कर उनके पिता ने आशा के भाई से बात की। भाई पहले बातों को नहीं समझ रहा था लेकिन बाद में अपनी बहन की समस्या को समझने के बाद भाई बहन की मदद के लिए आगे आया। इसके बाद आशा के पिता ने अपनी जमीन में से कुछ जमीन आशा के नाम कर दिया। आशा उस जमीन में खेती कर रही है। पति जब बीमारी से ठीक हुए तो अब वो भी खेती में आशा के साथ काम कर रहे है। अब उनकी समस्या दूर हो गयी है। इसके लिए वो मोबाइल वाणी को धन्यवाद देती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि उन्हें ग्रामवाणी सुन कर महिलाओं के जमीनी अधिकार के बारे में पता चला। कैसे महिला के लिए भी जमीनी अधिकार जरुरी है। अगर महिला के पास जमीन होगा तो वो अपना और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित और बेहतर कर सकती है। इस विषय पर प्रीति ने अपने घर में बात की तो परिवार वालों ने कहा की तुम्हें ससुराल में क्या कमी है। हमने अब तक अपने परिवार में किसी महिला के नाम पर जमीन नहीं की है, तो तुम्हें भी नहीं दिया जा सकता है। इसके बाद प्रीति ने कहा कि अब समय बदल गया है। समय के साथ सरकार ने भी अधिनियम बनाया है की महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर ही संपत्ति में अधिकार दिया जायेगा। इसलिए मुझे भी जमीन में हिस्सा चाहिए। नहीं तो मुझे कानून का सहारा लेना पड़ेगा। परिवार वालों ने आपस में विचार कर कहा की कानूनी चक्करों में पड़ने से अच्छा है अधिकार दे दिया जाए। इसके बाद जमीन में मेरा भी नाम हो गया और अब जब मेरे पति नहीं हैं, तो इस जमीन पर खेती कर के हम अपना जीवन यापन कर रहे हैं। यह सब संभव हो पाया क्योंकि मैंने ग्रामवाणी सुना और जानकारी ली।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से शालिनी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्हे मोबाइल वाणी के कार्यक्रम से जानकारी मिली कि महिलाओं को जमीन में मालिकाना हक़ मिलना चाहिए क्योंकि अगर महिला के पास उनके नाम की जमीन होगी तो वो अपना और अपने परिवार का अच्छे से ध्यान रख पाएगी। जानकारी से बातों को समझने के बाद शालीनी ने जमीन में हिस्सा लेने के बारे में अपने पति और अपने ससुर से बात किया। जिस पर ससुर ने कहा कि शालिनी को ससुराल में क्या कमी हो गयी है। आज तक परिवार में किसी महिला के नाम जमीन नहीं है। ये सुनने के बाद शालिनी ने कहा कि जब सरकार कानून बना चुकी है कि जमीन में जितना पुरुषों का हिस्सा है उतना ही महिलाओं का भी हिस्सा मिलना चाहिए तो इन्हे भी जमीन मिलना चाहिए। और अगर ससुराल में इन्हे जमीन में हिस्सा नहीं दिया जाएगा तो ये अदालत जा कर कानून का साथ लेगी। जिसके बाद इनके पति और ससुर ने आपस में बातचीत कर सलाह मशवरा किया कि आजतक परिवार में आदलत का कोई मुद्दा नहीं आया है। अगर शालिनी अदालत जाती है तो परिवार की बदनामी होगी। इस कारण ससुराल के जमीन में शालिनी को भी इनका हिस्सा मिल गया। कुछ दिन के बाद ससुर का देहांत हो गया और पति ने भी साथ छोड़ दिया। लेकिन शालिनी को इस बात की कोई चिंता नहीं हुई क्योंकि शालिनी को उनके जमीन में मालिकाना हक़ मिल गया था। अब जमीन में ही वो खेती बाड़ी का कार्य कर जीविका चला रही है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से स्नेहा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्होने मोबाइल वाणी के कार्यक्रम के माध्यम से सुना कि जमीन चाहे पिता के द्वारा दी गयी हो या पति के द्वारा दी गई हो ,महिलाओं के पास भी खुद की जमीन होनी चाहिए जिससे उनका वर्चस्व बना रहे। जिसके बाद इन्होने अपने पति से अपने खुद के नाम जमीन खरीद देने की बात कही। इनके पति ने उस वक़्त कहा कि इन्हे अभी जमीन की आवश्यकता क्यों है,इस पर स्नेहा ने उन्हें समझाया कि अभी नहीं तो भविष्य में जमीन की आवश्यकता पड़ सकती है। स्नेहा के पति प्राइवेट स्कूल में शिक्षक है। उनके चार भाई है। इनके पास एंटी पैतृक संपत्ति नहीं कि चारों भाई का भरण पोषण हो पाए। जिसके बाद स्नेहा के पति ने लोन लेकर स्नेहा के नाम जमीन खरीद दिया। कुछ समय अच्छा से बीता ,फिर उसके बाद अचानक स्नेहा के पति का देहांत हो गया। देहांत के बाद स्नेहा के अपने परिजन भी उनका साथ नहीं दिए। जिसके बाद स्नेहा ने अपने पति के बीमा के पैसे से अपने नाम की जमीन में चार कमरे बनवाया। सारे कमरे में उन्होंने किराया लगाया है। आज के समय में वही किराया का पैसा से इनका और इनके बच्चों का भरण पोषण हो रहा है। जमीन ही इनका रोज़ी रोटी का साधन बन गया है। स्नेहा मोबाइल वाणी को धन्यवाद देना चाहती है कि इन्हे जानकारी मिली कि महिलाओं के पास अपनी खुद की जमीन होनी चाहिए
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