उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से शालिनी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्हे मोबाइल वाणी के कार्यक्रम से जानकारी मिली कि महिलाओं को जमीन में मालिकाना हक़ मिलना चाहिए क्योंकि अगर महिला के पास उनके नाम की जमीन होगी तो वो अपना और अपने परिवार का अच्छे से ध्यान रख पाएगी। जानकारी से बातों को समझने के बाद शालीनी ने जमीन में हिस्सा लेने के बारे में अपने पति और अपने ससुर से बात किया। जिस पर ससुर ने कहा कि शालिनी को ससुराल में क्या कमी हो गयी है। आज तक परिवार में किसी महिला के नाम जमीन नहीं है। ये सुनने के बाद शालिनी ने कहा कि जब सरकार कानून बना चुकी है कि जमीन में जितना पुरुषों का हिस्सा है उतना ही महिलाओं का भी हिस्सा मिलना चाहिए तो इन्हे भी जमीन मिलना चाहिए। और अगर ससुराल में इन्हे जमीन में हिस्सा नहीं दिया जाएगा तो ये अदालत जा कर कानून का साथ लेगी। जिसके बाद इनके पति और ससुर ने आपस में बातचीत कर सलाह मशवरा किया कि आजतक परिवार में आदलत का कोई मुद्दा नहीं आया है। अगर शालिनी अदालत जाती है तो परिवार की बदनामी होगी। इस कारण ससुराल के जमीन में शालिनी को भी इनका हिस्सा मिल गया। कुछ दिन के बाद ससुर का देहांत हो गया और पति ने भी साथ छोड़ दिया। लेकिन शालिनी को इस बात की कोई चिंता नहीं हुई क्योंकि शालिनी को उनके जमीन में मालिकाना हक़ मिल गया था। अब जमीन में ही वो खेती बाड़ी का कार्य कर जीविका चला रही है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से स्नेहा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्होने मोबाइल वाणी के कार्यक्रम के माध्यम से सुना कि जमीन चाहे पिता के द्वारा दी गयी हो या पति के द्वारा दी गई हो ,महिलाओं के पास भी खुद की जमीन होनी चाहिए जिससे उनका वर्चस्व बना रहे। जिसके बाद इन्होने अपने पति से अपने खुद के नाम जमीन खरीद देने की बात कही। इनके पति ने उस वक़्त कहा कि इन्हे अभी जमीन की आवश्यकता क्यों है,इस पर स्नेहा ने उन्हें समझाया कि अभी नहीं तो भविष्य में जमीन की आवश्यकता पड़ सकती है। स्नेहा के पति प्राइवेट स्कूल में शिक्षक है। उनके चार भाई है। इनके पास एंटी पैतृक संपत्ति नहीं कि चारों भाई का भरण पोषण हो पाए। जिसके बाद स्नेहा के पति ने लोन लेकर स्नेहा के नाम जमीन खरीद दिया। कुछ समय अच्छा से बीता ,फिर उसके बाद अचानक स्नेहा के पति का देहांत हो गया। देहांत के बाद स्नेहा के अपने परिजन भी उनका साथ नहीं दिए। जिसके बाद स्नेहा ने अपने पति के बीमा के पैसे से अपने नाम की जमीन में चार कमरे बनवाया। सारे कमरे में उन्होंने किराया लगाया है। आज के समय में वही किराया का पैसा से इनका और इनके बच्चों का भरण पोषण हो रहा है। जमीन ही इनका रोज़ी रोटी का साधन बन गया है। स्नेहा मोबाइल वाणी को धन्यवाद देना चाहती है कि इन्हे जानकारी मिली कि महिलाओं के पास अपनी खुद की जमीन होनी चाहिए
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आज की युवा पीढ़ी महिला अधिकारों को एक नए नजरिए से देख रही है। जहां पहले अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक सीमित थी, वहीं अब यह लड़ाई डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कैंपेन यह सब उसके नए हथियार हैं.
भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से 44 वर्षीय विजउ पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि भारत में महिलाओं को पैतृक संपत्ति और जमीन में पुरुषों के बराबर अधिकार प्राप्त है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बेटियों को भी पिता की संपत्ति बेटों के बराबर हिस्सा मिलता है। महिलाओं को संपत्ति को गिरवी रखने या वसीयत का पूर्ण अधिकार है ,चाहे वो पैतृक हो या खुद की खरीदी गयी संपत्ति हो ,उनको पूर्ण अधिकार है।
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अपनी जमीन पाने के लिए अपना हक पाने के लिए कागजी कार्यवाही का पता होना भी बहुत जरूरी है। अगर आप अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। अगर आपको आपका अधिकार दिया जा रहा है। तो उसके लिए आपको जमीन की रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट इन सब के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। आपको रजिस्ट्री ऑफिस जा कर जरूर पता लगाना चाहिए की कैसे चीजें होती है। केवल लड़ाई या बोलने से नहीं होगा। आपको जमीनी स्तर पर जा कर चीजें सीखनी होगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अपनी जमीन होने से महिला को एक अलग ही स्वतंत्रता मिलती है। एक गरिमा का अनुभव होता है। वो किसी की बहन बेटी या पत्नी नहीं बल्कि एक स्वतंत्र व्यक्ति होती है। जिसकी अपनी आकांक्षाएं होती है। अपने सपने होते है जब किसी व्यक्ति के पास अपनी संपत्ति हो तो वो खुद को सशक्त महसूस करती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अगर महिला को अपने अधिकारों या इसके प्रोसेस के बारे में नहीं पता है। जमीन कैसे लेनी है इन सभी बातों की जानकारी नहीं है। तो इस बारे में कानूनी सहायता लेना भी सशक्तिकरण के प्रति एक पहला कदम है। आपको जब भी ऐसी जरूरत महसूस हो तो कानूनी मदद जरूर लें
