उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से शालिनी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्हे मोबाइल वाणी के कार्यक्रम से जानकारी मिली कि महिलाओं को जमीन में मालिकाना हक़ मिलना चाहिए क्योंकि अगर महिला के पास उनके नाम की जमीन होगी तो वो अपना और अपने परिवार का अच्छे से ध्यान रख पाएगी। जानकारी से बातों को समझने के बाद शालीनी ने जमीन में हिस्सा लेने के बारे में अपने पति और अपने ससुर से बात किया। जिस पर ससुर ने कहा कि शालिनी को ससुराल में क्या कमी हो गयी है। आज तक परिवार में किसी महिला के नाम जमीन नहीं है। ये सुनने के बाद शालिनी ने कहा कि जब सरकार कानून बना चुकी है कि जमीन में जितना पुरुषों का हिस्सा है उतना ही महिलाओं का भी हिस्सा मिलना चाहिए तो इन्हे भी जमीन मिलना चाहिए। और अगर ससुराल में इन्हे जमीन में हिस्सा नहीं दिया जाएगा तो ये अदालत जा कर कानून का साथ लेगी। जिसके बाद इनके पति और ससुर ने आपस में बातचीत कर सलाह मशवरा किया कि आजतक परिवार में आदलत का कोई मुद्दा नहीं आया है। अगर शालिनी अदालत जाती है तो परिवार की बदनामी होगी। इस कारण ससुराल के जमीन में शालिनी को भी इनका हिस्सा मिल गया। कुछ दिन के बाद ससुर का देहांत हो गया और पति ने भी साथ छोड़ दिया। लेकिन शालिनी को इस बात की कोई चिंता नहीं हुई क्योंकि शालिनी को उनके जमीन में मालिकाना हक़ मिल गया था। अब जमीन में ही वो खेती बाड़ी का कार्य कर जीविका चला रही है।

आज की युवा पीढ़ी महिला अधिकारों को एक नए नजरिए से देख रही है। जहां पहले अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक सीमित थी, वहीं अब यह लड़ाई डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कैंपेन यह सब उसके नए हथियार हैं.

भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से 44 वर्षीय विजउ पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि भारत में महिलाओं को पैतृक संपत्ति और जमीन में पुरुषों के बराबर अधिकार प्राप्त है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बेटियों को भी पिता की संपत्ति बेटों के बराबर हिस्सा मिलता है। महिलाओं को संपत्ति को गिरवी रखने या वसीयत का पूर्ण अधिकार है ,चाहे वो पैतृक हो या खुद की खरीदी गयी संपत्ति हो ,उनको पूर्ण अधिकार है।

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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अपनी जमीन पाने के लिए अपना हक पाने के लिए कागजी कार्यवाही का पता होना भी बहुत जरूरी है। अगर आप अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। अगर आपको आपका अधिकार दिया जा रहा है। तो उसके लिए आपको जमीन की रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट इन सब के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। आपको रजिस्ट्री ऑफिस जा कर जरूर पता लगाना चाहिए की कैसे चीजें होती है। केवल लड़ाई या बोलने से नहीं होगा। आपको जमीनी स्तर पर जा कर चीजें सीखनी होगी

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अपनी जमीन होने से महिला को एक अलग ही स्वतंत्रता मिलती है। एक गरिमा का अनुभव होता है। वो किसी की बहन बेटी या पत्नी नहीं बल्कि एक स्वतंत्र व्यक्ति होती है। जिसकी अपनी आकांक्षाएं होती है। अपने सपने होते है जब किसी व्यक्ति के पास अपनी संपत्ति हो तो वो खुद को सशक्त महसूस करती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अगर महिला को अपने अधिकारों या इसके प्रोसेस के बारे में नहीं पता है। जमीन कैसे लेनी है इन सभी बातों की जानकारी नहीं है। तो इस बारे में कानूनी सहायता लेना भी सशक्तिकरण के प्रति एक पहला कदम है। आपको जब भी ऐसी जरूरत महसूस हो तो कानूनी मदद जरूर लें

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अक्सर ये कहा जाता है की लड़की को जमीन देने से पराया धन चला जाता है। लेकिन असल में ये सोच ही गलत है। अधिकार देना कभी भी नुकसान नहीं हो सकता और किसी का भी अधिकार छीनना गलत बात है। वो चाहे आप कोई भी बहाना देकर करें। महिलाओं को और पुरुषों को सबको अपना बराबर का अधिकार मिलना आवश्यक है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जब महिला के पास रिसोर्सेज होते हैं। उसकी जमीन होती है, तो वो अपनी बेटियों को पढ़ाने में ज्यादा योगदान कर पाती है। जिससे की आने वाली पीढ़ी भी सशक्त हो सके। बेटियां पढ़ सकेें आगे बढ़ सकेें। ये भी भूमि अधिकार का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। इसे भी ध्यान में रखना चाहिए आप महिलाओं को जमीन देते हैं तो केवल वो पीढ़ी आगे नहीं बढ़ेगी बल्कि आने वाली सभी पीढ़ियों को सशक्त करने का मार्ग खुलेगा