उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को भूमि अधिकार मिलने से बहुत ही फायदे हो रहे हैं। इससे ना केवल उनका व्यक्तिगत जीवन सुधरता है, बल्कि पूरे समाज पर प्रभाव पड़ता है। जिसे की उनकी एक आय का श्रोत भी बनता है। भूमि अधिकार मिलने से आर्थिक सशक्तिकरण और सुरक्षा का भी आभास होता है। इससे उन्हें आर्थिक समस्याओं से कोई परेशानी नहीं होती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि पुराने समय में महिलाओं को सिर्फ काम करने की आजादी थी। महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी नहीं थी। समाज में उनका कोई वैल्यू नहीं था। लेकिन आज के समय में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई ऐसे नियम बनाए गए हैं। जिससे उन्हें आत्मनिर्भर और संपत्ति का मालिक बना कर समाजीकोर आर्थिक तौर पर सशक्त बनाना है सुरक्षा देना है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमजान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि महिलाओं के जमीनी अधिकार के बारे में लोगों से चर्चा करने पर लोगों ने कहा कि अगर महिला मायके में जमीन में हिस्सा लेती है तो भाइयों से विवाद होगा। अधिकतर लोगों के विचार है कि महिलाएँ को अपने पति की संपत्ति में हिस्सा लेना चाहिए न कि मायके में अपने भाइयों के हिस्से में .
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि विवाहित बेटी हो या अविवाहित सबको समान हिस्सा मिलेगा। महिलायें अपने अर्जित संपत्ति की एक मात्र मालिक खुद होती हैं
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार पिता की संपत्ति पर बेटी का समान अधिकार होता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 50 वर्षीय दीपक मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि इनकी माँ के नाम से जमीन है लेकिन सरकारी का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसके लिए इन्होने बताया कि पहले कृषि विभाग में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा। इसके बाद ही इन्हे सरकारी योजना का लाभ मिल पाएगा जैसे खाद ,बीज ,सब्सिडी आदि। इसकी जानकारी लेने के बाद में इनकी माता ने रजिस्ट्रेशन करवाने का फैसला लिया ताकि सरकारी योजना का लाभ ले सके
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 50 वर्षीय दीपक मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि इन्होने विजय पाल चौधरी से मिल कर जमीन का पट्टा मिलने के विषय में जानकारी दिया। जानकारी पा कर विजय पाल संतुष्ट हुए और उस विषय में आगे का कार्य शुरू किया
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि महिला के पति की मृत्यु हो जाने पर वसीहत समय लेखपाल द्वारा बेटा ,बेटी और पत्नी के नाम पर जमीन की बात होती है। जब तक बेटी मायके में रहती है तो उसके नाम पर जमीन रहना ठीक है। लेकिन जब शादी कर के ससुरात जाती है तो ससुराल वाले लड़की को उसके जमीन को लेकिन परेशान करते है कि जमीन में नाम है तो वो मिलना ही चाहिए।इसकी को लेकर आगे यह जमीन विवाद का कारण बनता है और रिश्तों में मन मुटाव आता है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अरविन्द श्रीवास्तव कहते हैं कि महिलायें कृषि कार्य करती तो हैं, लेकिन उनके नाम पर जमीन नहीं होने के कारण वो मजदूर वर्ग तक सीमित हो जाती हैं। जिससे उन्हें बहुत कम आय प्राप्त होती है। लेकिन अगर उनके नाम पर जमीन होगी तो वो बहुत सशक्त हो सकती हैं। महिलायें पुरुषों से अधिक मेहनत करती हैं। लेकिन जमीन अपने नाम नहीं रहने के कारण परेशान भी रहती है। सरकार भी कानून बना चुकी है कि पति की मृत्यु के बाद महिला के नाम और उसके बच्चों के नाम पर बराबर ही जमीन होगी विरासत के तौर पर। लेकिन अभी भी समस्या यह है कि महिलाओं को मालिकाना हक बेटों के द्वारा माँ को नहीं मिलता है और वो सिर्फ जमीन पर काम कर पाती हैं। उसका उपयोग अपने अनुसार नहीं कर पाती है
कल के नेता, आज की आवाज़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक आह्वान है—युवाओं के लिए, समाज के लिए और नीति निर्माताओं के लिए। यदि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएं, तो वे भूमि न्याय के आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। भविष्य का भारत तभी सशक्त और न्यायपूर्ण होगा, जब आज की युवा आवाज़ भूमि पर समान अधिकार की मांग को मजबूती से उठाएगी। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- “हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *--- “अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
