उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या किशोरी अवस्था में निर्णय लेना मुश्किल होता है ?
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि किशोर बच्चे किसी नए चीज को आजमाना पसंद करते हैं ?
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हाँ, किशोर बच्चों के लिए नई-नई चीज़ें आज़माना सामान्य है। इस उम्र में जिज्ञासा बढ़ जाती है और वे नए विचारों, शौकों और अनुभवों को अपनाना चाहते हैं। इससे उन्हें अपने बारे में, दुनिया के बारे में ज़्यादा जानने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है। किशोर आसानी से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए ज़रूरी है कि उन्हें सही मार्गदर्शन दिया जाए ताकि वे सुरक्षित और अच्छी गतिविधियों को अपनाएँ, जो उनके सकारात्मक विकास में सहायक हों। साथ ही, उन्हें इतना स्थान देना भी ज़रूरी है कि वे अपने रास्ते खुद खोज सकें और अलग-अलग अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ें।
Sept. 22, 2025, 4 p.m. | Tags: information mentalhealth
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोरावस्था में नींद की समस्या हो सकती है ?
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हाँ, किशोरावस्था में नींद के पैटर्न बदलना सामान्य है, क्योंकि इस समय शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव होता है। इसके अलावा स्कूल का जल्दी समय, पढ़ाई, अतिरिक्त गतिविधियाँ, मोबाइल/टीवी का ज़्यादा इस्तेमाल और सामाजिक गतिविधियाँ भी नींद को प्रभावित करती हैं। इन सब कारणों से समय पर सोना, संतुलित नींद का समय बनाए रखना, सुबह समय पर उठना और 8–10 घंटे की पूरी नींद लेना मुश्किल हो जाता है। कम नींद लेना या बहुत ज़्यादा सोना मूड, खाने-पीने की आदतों और व्यवहार पर असर डाल सकता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि ध्यान रखा जाए कि आप कितनी नींद ले रहे हैं और उसे सही तरह से प्रबंधित करें। इसके लिए मददगार तरीके हैं—सोने से पहले मोबाइल-टीवी से दूर रहना, आरामदायक रात की दिनचर्या बनाना और रात में चाय-कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय से दूर रहना।
Sept. 22, 2025, 3:25 p.m. | Tags: information health mentalhealth
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोरों को रिश्तों में बदलाव महसूस होता है ?
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हाँ, किशोरावस्था में रिश्तों में बदलाव आना सामान्य है। हार्मोन में होने वाले बदलाव लोगों के दुनिया को देखने के तरीके पर बड़ा असर डालते हैं। इस उम्र में परिवार से थोड़ी दूरी महसूस होना और दोस्तों के साथ ज़्यादा समय बिताना आम बात है। इसी दौरान किसी पर मन लगना या रोमांस में दिलचस्पी लेना भी शुरू हो सकता है। यह सब बड़े होने की स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे समय में परिवार या भरोसेमंद दोस्तों से खुलकर बात करना ज़रूरी है। पढ़ाई, शौक और रिश्तों के बीच संतुलन बनाने से यह बदलाव आसानी से संभाले जा सकते हैं।
Sept. 22, 2025, 3:22 p.m. | Tags: information mentalhealth
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोरावस्था में अपने शरीर की चिंता होती है ?
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हाँ, किशोरावस्था में अपने शरीर को लेकर चिंता होना बिल्कुल सामान्य है। इस उम्र में हार्मोन और शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिससे रूप-रंग, वज़न या शरीर के हिस्सों को लेकर सवाल मन में उठते हैं। अक्सर लोग दूसरों से या अपने ही पहले के रूप से तुलना करने लगते हैं। अगर यह चिंता ज़्यादा बढ़ जाए, तो मन पर बोझ डाल सकती है। याद रखिए, आपका शरीर खास और अनोखा है। इसकी देखभाल करें और दूसरों से तुलना करने से बचें।
Sept. 22, 2025, 3:17 p.m. | Tags: information mentalhealth
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोरों को अपनी भावनाओं को समझना चाहिए ?
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोरी अवस्था में खुद को समझना मुश्किल होता है ?
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोरी अवस्था में आत्मविश्वास में कमी आ सकती है ?
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोरी अवस्था में अकेलेपन का एहसास हो सकता है ?
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किशोरावस्था ऐसा समय है जब युवा अपने दोस्तों को चुनने में अधिक चयनात्मक हो जाते हैं।वे अक्सर उन लोगों से ज़्यादा जुड़ते हैं जो उन्हें अपने जैसे लगते हैं।लेकिन यही समय टकरावों का भी हो सकता है दोस्तों, माता-पिता या खुद के साथ।कभी-कभी, कई कारणों से, कोई किशोर दूसरों से जुड़ने में कठिनाई महसूस करता है, और उसे अपनापन महसूस नहीं होता।यह स्थिति अकेलेपन में बदल सकती है।अगर किशोर अपने भावनाओं को समझने और उनसे जुड़ने में भी संघर्ष करता है, तो यह अकेलापन और बढ़ सकता है।जब यह अकेलापन लंबे समय तक बना रहता है और व्यक्ति के रिश्तों, गतिविधियों और रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करने लगता है, तो मदद लेना ज़रूरी होता है जैसे किसी भरोसेमंद वयस्क, परामर्शदाता या डॉक्टर से।खास तौर पर, जब यह अकेलापन खुद के प्रति नकारात्मक सोच के साथ जुड़ जाए, तो यह सावधानी और सहायता की आवश्यकता का संकेत होता है।
Nov. 1, 2025, 11:10 a.m. | Tags: information health mentalhealth
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोर अवस्था में परिवार का साथ रहना जरूरी है ?
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किशोरावस्था वह समय है जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से विकसित होता है।इस दौरान वह अपने आस-पास के माहौल और खुद के बारे में अधिक जटिल भावनाएँ महसूस करता है।वह यह भी सीखता है कि अपने अनुभवों और परिस्थितियों के अनुसार खुद को कैसे समझे और ढाले । ऐसी भावनात्मक संतुलन पर परिवार का वातावरण और दोस्तों के साथ संबंध का गहरा असर पड़ता है।किशोर से बात करने का तरीका भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।उदाहरण के लिए, अगर कोई किशोर अपने बारे में बार-बार नकारात्मक बातें सुनता है, तो वह खुद के बारे में भी वैसी ही सोच विकसित कर सकता है।वहीं अगर वह इन बातों को पूरी तरह अनदेखा कर दे, तो वह जरूरी सलाह और मार्गदर्शन से वंचित रह सकता है।उनके जीवन में मौजूद बड़े लोग इस समय में बहुत मददगार हो सकते हैं वे एक प्यारभरा और सम्मानजनक माहौल बना सकते हैं,ध्यान से सुननेका अभ्यास कर सकते हैं ताकि किशोर अपनी बात खुलकर कह सके और साझा रूप से समस्या हल करने में उसे शामिल कर सकते हैं यानी निर्णय लेने में उसकी राय का सम्मानपूर्वक स्वागत करें।
Nov. 1, 2025, 11:09 a.m. | Tags: information health mentalhealth

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हाँ, किशोरावस्था में फैसले लेना मुश्किल हो सकता है। इसका कारण यह है कि इस उम्र में उनका दिमाग विकसित हो रहा होता है और वे नई राय और सोच बना रहे होते हैं। उनके संस्कार और मूल्य भी बदलते रहते हैं। ऐसे में दिमाग के अंदर बहुत उलझन रहती है, जिससे किसी बात पर निष्पक्ष होकर सोचना और सही विकल्प चुनना कठिन हो जाता है। इसलिए ज़रूरी है कि जल्दबाज़ी न करें और अलग-अलग संभावनाओं पर सोचने के लिए समय लें। किशोरों को इतना स्थान मिलना चाहिए कि वे अपने लिए सबसे उचित निर्णय ले सकें। साथ ही, उन्हें सही मार्गदर्शन और धैर्य भी चाहिए ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपना निर्णय ले सकें।
Sept. 22, 2025, 4:03 p.m. | Tags: information health mentalhealth