उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशीष दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहते है कि क्या किशोर अवस्था में परिवार का साथ रहना जरूरी है ?

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किशोरावस्था वह समय है जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से विकसित होता है।इस दौरान वह अपने आस-पास के माहौल और खुद के बारे में अधिक जटिल भावनाएँ महसूस करता है।वह यह भी सीखता है कि अपने अनुभवों और परिस्थितियों के अनुसार खुद को कैसे समझे और ढाले । ऐसी भावनात्मक संतुलन पर परिवार का वातावरण और दोस्तों के साथ संबंध का गहरा असर पड़ता है।किशोर से बात करने का तरीका भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।उदाहरण के लिए, अगर कोई किशोर अपने बारे में बार-बार नकारात्मक बातें सुनता है, तो वह खुद के बारे में भी वैसी ही सोच विकसित कर सकता है।वहीं अगर वह इन बातों को पूरी तरह अनदेखा कर दे, तो वह जरूरी सलाह और मार्गदर्शन से वंचित रह सकता है।उनके जीवन में मौजूद बड़े लोग इस समय में बहुत मददगार हो सकते हैं वे एक प्यारभरा और सम्मानजनक माहौल बना सकते हैं,ध्यान से सुननेका अभ्यास कर सकते हैं ताकि किशोर अपनी बात खुलकर कह सके और साझा रूप से समस्या हल करने में उसे शामिल कर सकते हैं यानी निर्णय लेने में उसकी राय का सम्मानपूर्वक स्वागत करें।
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Nov. 1, 2025, 11:09 a.m. | Tags: information   health   mentalhealth