उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या किशोरी अवस्था में निर्णय लेना मुश्किल होता है ?
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या किशोरी अवस्था में निर्णय लेना मुश्किल होता है ?
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हाँ, किशोरावस्था में फैसले लेना मुश्किल हो सकता है। इसका कारण यह है कि इस उम्र में उनका दिमाग विकसित हो रहा होता है और वे नई राय और सोच बना रहे होते हैं। उनके संस्कार और मूल्य भी बदलते रहते हैं। ऐसे में दिमाग के अंदर बहुत उलझन रहती है, जिससे किसी बात पर निष्पक्ष होकर सोचना और सही विकल्प चुनना कठिन हो जाता है। इसलिए ज़रूरी है कि जल्दबाज़ी न करें और अलग-अलग संभावनाओं पर सोचने के लिए समय लें। किशोरों को इतना स्थान मिलना चाहिए कि वे अपने लिए सबसे उचित निर्णय ले सकें। साथ ही, उन्हें सही मार्गदर्शन और धैर्य भी चाहिए ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपना निर्णय ले सकें।
Sept. 22, 2025, 4:03 p.m. | Tags: information health mentalhealth