उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से नीलू ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि मौसम गर्म हो रहा है। जिससे बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि प्रदूषण, पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष को कहते हैं। प्रदूषक पर्यावरण को और जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुंचाते हैं।प्रदूषण का अर्थ है -'वायु, जल, मिट्टी आदि का अवांछित द्रव्यों से दूषित होना', जिसका सजीवों पर प्रत्यक्ष रूप से विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा पारितन्त्र|पारिस्थितिक तन्त्र को नुकसान द्वारा अन्य अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ते हैं। वर्तमान समय में पर्यावरणीय अवनयन का यह एक प्रमुख कारण है।प्रकृति द्वारा निर्मित वस्तुओं के अवशेष को जब मानव निर्मित वस्तुओं के अवशेष के साथ मिला दिया जाता है तब दूषक पदार्थों का निर्माण होता है। दूषक पदार्थों का पुनर्चक्रण नही किया जा सकता है।किसी भी कार्य को पूर्ण करने के पश्चात् अवशेषों को पृथक रखने से इनका पुनःचक्रण वस्तु का वस्तु एवम् उर्जा में किया जाता है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में महिलाओं के लिए बहुत से संवैधानिक सुरक्षात्मक उपाय बनाए हैं। पर जमीनी हकीकत इससे बहुत अलग है। इन सभी प्रावधानों के बावजूद देश में महिलाओं के साथ आज भी द्वितीय श्रेणी नागरिक के रूप में व्यवहार किया जाता है। पुरुष उन्हें कामुक इच्छाओं की पूर्ति का साधन मानते हैं। महिलाओं के साथ अत्याचार अपने खतरनाक स्तर पर है। कन्या भ्रूण हत्या और दहेज प्रथा समाज में देखा जा रहा है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था में यह सोच बहुत गहरे तक बैठी है कि जमीन पुरुषों के नाम ही होनी चाहिए।नौकरी के लिए पुरुष के शहरी क्षेत्र में प्रवास के बाद पुरे एरिया में कृषि क्षेत्र में महिला की संख्या बढ़ी है। बावजूद इसके अभी भी जमीन का मालिकाना हक़ नही के बराबर है। यही नही विवाहित महिला से उनके पीहर पक्ष द्वारा निरंतर दबाव बनाया जाता है कि वो पैतृक सम्पत्ति पर अपना अधिकार छोड़ दें। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं अर्थव्यवस्था की विपरीत लहार आते ही रोजगार खो देती हैं। भूमि का अधिकार विश्व के अधिकांश देशों में आर्थिक स्थिरता का सबसे मजबूत समाधान माना गया है। विभिन्न देशों में हुए अध्ययन बताते हैं कि जहां भी महिलाओं के पास भूमि सम्बंधित अधिकार होते हैं वहां पर उनके परिवार पर प्रभाव होता है। वो अपने विचारों को आत्मविश्वास के साथ रख पाती हैं। साथ ही वो घरेलू हिंसा की भी बहुत कम शिकार होती हैं। यह स्वाभाविक भी है। जिनके पास अचल सम्पत्ति के अधिकार होते हैं उनका प्रभुत्व परिवार और समाज में कहीं अधिक होता है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रियंका सिंह ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाऐं अर्थव्यवस्था की विपरीत लहर आते ही अपना रोजगार खो देती है। भूमि का अधिकार विश्व के अधिकांश देश में आर्थिक स्थिति का सबसे मज़बूत साधन माना गया है। विभिन्न देश में हुए अध्यन्न बताते है कि जहाँ महिलाएँ के पास भूमि सम्बंधित अधिकार होता है वहाँ उनके परिवार पर प्रभाव होता है। वे अपने परिवार को आत्मविश्वास के साथ रख पाती है साथ ही वो घरेलु हिंसा की भी कम शिकार होती है। जिसके पास संपत्ति का अधिकार होता है उनका प्रभुत्व परिवार और समाज में अधिक होता है
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पानी मनुष्य के लिए बहुत जरुरी है। यह शरीर के कई कामों के लिए जरुरी है। पानी शरीर का एक अहम् पोषक तत्व है और शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। पानी शरीर के अपशिष्ट पदार्थ को बहार निकलने में मदद करता है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए महिला को सशक्त बनाने की आवश्यकता है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निजी और सार्वजानिक स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तथा संसाधन तक पहुँच पुरुषों के पक्ष में न हो.ताकि महिला और पुरुष में उत्पादक और प्रजनन जीवन में समान भागीदारी के रूप में पूरी तरह से भाग ले सकें।लैंगिक असमानता वाले समाजों में एक जुटता कम होती है। उनमे सामाजिक व्यवहार और हिंसा की दर अधिक होती है। लैंगिक समानता वाले देश अधिक जुड़े हुए हैं और उनके लोग स्वास्थ्य होते हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि संवैधानिक सूची के साथ-साथ सभी प्रकार के भेदभाव या असमानताएं चलती रहेंगी लेकिन वास्तिविक बदलाव तो तभी संभव हैं जब पुरुषों की सोच को बदला जाये। ये सोच जब बदलेगी तब मानवता का एक प्रकार पुरुष महिला के साथ समानता का व्यवहार करना शुरु कर दे न कि उन्हें अपना अधीनस्थ समझे।
मानव जीवन में डॉक्टर्स की भूमिका बहुत खास है। उन्हें भगवान से कम नहीं समझा जाता है। क्योंकि भगवान की तरह डॉक्टर भी एक व्यक्ति को नया जीवन देने में भूमिका निभाते हैं। छोटी-छोटी से समस्या हो या गंभीर बीमारी, डॉक्टर ही एक ऐसा व्यक्ति है जिसके पास मानव शरीर की सभी परेशानियों का उपचार है।एक जुलाई को ही डॉक्टर दिवस मनाने की एक खास वजह भी है. महान चिकित्सक डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय का जन्मदिन 1 जुलाई 1882 को हुआ था. इतना ही नहीं एक जुलाई 1962 को ही डॉ बिधान का निधन हुआ था. इसलिए तब से डॉक्टर को सम्मान देने के रूप में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। साथ ही हमारे देश में स्वास्थ्य को एक सेवा के रूप में देखा जाता है और हमारे चिकित्सा पेशेवरों ने अथक और निस्वार्थ भाव से काम करके अपने देश की सेवा भाव एवं सेवा परमो धर्म की परंपरा का पालन किया है. यही एकमात्र कारण था कि हमारे कोविड योद्धा मौके पर खड़े हुए और निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्य का पालन किया.तो आइये दोस्तों हम सब मिलकर चिकित्सक के कार्य की सराहना और मानव जीवन में उनकी भूमिका का सम्मान करें। मोबाइल वाणी की ओर से आप सब को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की हार्दिक बधाई।
