उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि 1994 से 2012 के बीच 133 मिलियन भारतीय गरीबी से बहार निकले।यह एक ऐसी उपलब्धि है जिस पे भारत और दुनिया को गर्व हो सकता है.परन्तु सफलता और भी आनंददायक होती अगर अधिक संख्या में महिलाएं कार्यबल में अपना योगदान दे पाती। 2012 में 79 प्रतिष्ठान पुरुषों की तुलना में केवल 27 प्रतिशत भारतीय महिला के पास नौकरी थी या वो सक्रीय रूप से नौकरी की तलाश में थी।दरअसल 2005 और 2012 के बीच लगभग बीस मिलियन महिलाएं कार्यबल से बाहर हो गई थी ।चिंता की बात यह है कि भारत के तेजी से हो रहे सशक्तिकरण ने अभी तक अधिक महिलाओं को श्रम शक्ति में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया है। ग्रामीण नौकरियां कम हो रही हैं और पर्याप्त ग्रामीण महिलाएं शहरी क्षेत्र में कामकर के सक्षम नही हो पा रही हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।