नाम विशाल सिंह पिता का नाम विजय सिंह ब्लॉक हजूरपुर थाना हजूरपुर तहसील पयागपुर जिला बहराइच अक्सर भी देहात तथा शहरों में प्राइवेट डॉक्टर तथा सरकारी डॉक्टर उल्टा सीधा दवाइयां देकर समाज को बीमार कर देते हैं और जो ओरिजिनल दवा होता है वह बाहर के लिए सप्लाई करते हैं अक्सर समाजों में दिक्कत
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ जीव दास साहू ,ज्वार के फसल में लगने वाले रोग और किट नियंत्रण की जानकरी दे रहे हैं। ज्वार के फसल से जुड़ी कुछ बातें किसानों को ध्यान में रखना ज़रूरी है। इसकी पूरी जानकारी सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला के पयागपुरब्लॉक से साक्षी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से शिव कुमार तिवारी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने ने बताया की महिलाओं को सरकार द्वारा खेती के लिए अनुदान सभी तरह की योजना का लाभ मिलना चाहिए जिससे महिलाओं का जीवन बेहतर बन सके। सरकार के द्वारा महिलाओं को तकनीकी खेती के बारे में बताना चाहिए। महिलाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य के बारे में बताया जाना चाहिए और प्रत्येक महिला को शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए बेहतर उपाय किए जाने चाहिए कि वह स्वस्थ रहे। शिक्षा होनी चाहिए और उन्हें विशेष रूप से बैठकें करके जानकारी दी जानी चाहिए। महिलाओं को सामाजिक तौर पर भूमि का अधिकार उनके हिसाब से मिलना चाहिए, अगर कोई महिला 40 वर्ष से ऊपर है और घर में कोई कमाने वाला नहीं है तो उन्हें भूमि का अधिकार अवश्य मिलना चाहिए
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से साक्षी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से तिलक राम से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया की महिलाओं को रोजगार मिलना चाहिए और उनके अधिकार और समाज में जागरूकता बढ़ाना चाहिए जिससे महिलाओं का जीवन बेहतर बनाया जा सके।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से राकेश जी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने ने बताया की महिलायें अच्छे व्यवसाय का चयन कर के अच्छा मुनाफा कमा सकती है। पहले के समय में ग्रामीण क्षेत्र के लोग कम पढ़े लिखे रहते थे यही कारण लोग शिक्षा और स्वास्थय पर ध्यान नहीं देते थे पर अब देश के विकास के साथ सब बदल गया है। गाँव के विकास के साथ साथ देश का विकास होता है।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से रिंकी जी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया की महिलायें अपने जीवन को बेहतर बना सकती है। जैसे कि पति के नाम पर दस बीघा जमीन और महिला के नाम पर पांच बीघा जमीन तो वो उसमे खेती या कोई भी व्यवसाय कर सकती है और बेहतर बन सकती है, और अपने बच्चो को पढ़ा सकती है। गांवों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी कम है और इस तरह उनके पास कोई आर्थिक अवसर नहीं हैं। ऐसे कई पुरुष हैं जो सोचते हैं कि महिलाएं दूर नहीं जा सकती हैं, लेकिन अब एक कमाने और दस खाने का जमाना नहीं है। पुरुष वर्ग यह सोचता है की कुछ महिलायें इस अधिकार का गलत इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन सारी महिलायें एक जैसी नहीं होती इस लिए समाज को अपनी सोच बदलने की जरुरत है
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से साक्षी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से पचन नाथ से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने ने बताया की महिलाओं को खेती और किसी के अलावा उन्हें सभी प्रकार के रोजगार और योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए जिससे वे कोई काम करके अपने जीवन में आगे बढ़ सके और अपने जीवन को बेहतर बना सके। महिलाये शिक्षित हो जाएँगी तो समाज में आगे बढ़ेंगी जिससे वो अपने परिवार का लालन पालन करेंगी।महिलायें समूह बनाते हैं और एक संगठन बनाते हैं और एक संगठन बनाने के बाद, उन्हें धीरे-धीरे ब्याज पर बहुत पैसा मिलेगा ताकि वे अपना कोई भी कारखाना चला सकें। और जब वे कुटीर उद्योग चलाते हैं, तो वे अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं और उनकी आजीविका आसानी से चल सकती है क्योंकि सरकार भी संविधान के अनुसार महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए तैयार है और आगे बढ़ रही है। उतना विकास नहीं हुआ है जितना होना चाहिए था और पुरुषों के बाद महिलाओं को भी अपने अधिकार मिल रहे हैं ताकि जब उनके भीतर थोड़ी जागरूकता हो, तो धीरे-धीरे समूह और किसी के द्वारा इसे और विकसित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से ओम प्रकाश प्रजापति से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने ने बताया की महिलाये अब पिछड़ी नहीं है महिलाएं हर विभाग में तेजी से भाग ले रही हैं, चाहे वह शिक्षा विभाग हो, स्वास्थ्य विभाग हो, रेलवे विभाग हो, न्याय विभाग हो, हर जगह महिलाएँ बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही है। यह सिर्फ इतना है कि ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं को उतनी शिक्षा नहीं दी जा रही है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में, अपनी महिलाओं को शिक्षित करने का प्रयास करना आवश्यक है। स्वतंत्र निर्णय कोई भी व्यक्ति ले सकता है, स्वतंत्र निर्णय कोई भी महिला ले सकती है, किसी पर कोई दबाव नहीं है। महिलाओं को उतना ही अधिकार देना चाहिए जितने में उनका आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। महिलाओं के भूमि अधिकारों के मार्ग में ऐसी कोई बाधा नहीं है। ऐसे कई लोग हैं जिन्हें अब महिलाओं को जमीन दी जा रही है क्योंकि अगर किसी पुरुष के नाम पर जमीन दी जाती है तो उसका वजीफा अधिक होता है और महिलाओं के नाम जाती है तो स्टांप कम लगता है तो भूमि अधिकार तो उनको मिलता ही चला जा रहा है। महिलाओं को शिक्षित किया जाये और उनके बच्चो को शिक्षित किया जाये
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