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आमगांव बड़ा अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व जहां पूरे देश के मंदिर परिसर एवं मंदिरों को पहुंचने वाली सड़के गंदगी मुक्त हो गई है वही ग्राम का प्रमुख खेरापति मंदिर बायपास सड़क पहुंच मार्ग नालियों की निकली गंदगी से सजा हुआ है ज्ञात होवे कि बायपास सड़क से लगी नालियों की गंदगी पंचायत के सफाई कर्मियों ने तो 1 महीने पूर्व साफ कर दी परंतु नालियों की गंदगी को सड़क के ऊपर रखे 1 महीना गुजर गया बावजूद इसके पंचायती कचरा वाहन नहीं ले गया जिससे खेड़ापति मंदिर जाने वाली महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है उनका कहना है नालियों की गंदगी रखी होने के कारण सड़क की चौड़ाई कम हो गई है गन्ने सीजन चालू है गन्ने की ट्राली निकलते समय गंदी नालियों का कचरा रखा होने के कारण उन्हें जगह नहीं बचती कि वह निकल सके टू व्हीलर फोर व्हीलर वाहन भी ओवरटेक करने में भारी दिक्कत कर रहे हैं कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है बावजूद इसके पंचायत प्रशासन लापरवाह बना हुआ है
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आमगांव बड़ा से 12 किलोमीटर दूर स्थित धार्मिक आस्था की केंद्र बंजारी माता मंदिर तक जाने वाला मार्ग जगह-जगह से उबड़ खाबड़ हो गया है ऐसी स्थिति में यहां आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ता है लेकिन जनप्रतिनिधियो द्वारा कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है लोगों में काफी निराशा है अतः लोगों ने इस मार्ग को अति शीघ्र सड़क मार्ग बनाने की मांग की है
करेली नगर में चिन्हित पार्किंग की समस्या लंबे समय से बनी हुई है वहीं मुख्य बाजार रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैंड तक और बरमान चौराहा से लेकर बस्ती चौराहा कहीं पर भी चिन्हित पार्किंग ना होने से हर जगह बेहतरीन बहन मुख्य सड़क पर खड़े रहने से यातायात अराजक हो रहा है
आमगांव बड़ा ग्राम बिलोनी में विनोद राजपूत के निज निवास में चल रही रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन सिमरिया कला वाले पंडित चंद्रशेखर कुरचानिया ने कृष्ण-सुदामा मित्रता का प्रसंग सुनाया। श्रद्धालु सुदामा चरित्र सुन भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सच्चा दोस्त वही है जो मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए मदद कर दे। कलियुग में केवल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध होता है, तभी तक मित्रता रहती है। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास ने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारिकापुरी जाते हैं। महल के द्वार पर पहुंचकर प्रहरी को भगवान कृष्ण का मित्र बताकर अंदर जाने की बात कहते हैं। इस पर प्रहरी उनका उपहास उड़ाते हैं। कथा व्यास ने पंडित चंद्रशेखर कुरचानिया ने कहा कि जब एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को पूरा वृतांत सुनाता है तो श्रीकृष्ण नंगे पांव ही सुदामा के पीछे दौड़ने लगते हैं और रोककर सुदामा को गले लगा लेते हैं। प्रभु मित्र सुदामा की दुर्दशा को देखकर इतना दुखी हुए कि प्रभु श्रीकृष्ण के आंखों से निकल रहे आंसुओं से सुदामा के पैर धुल गए राजपूत परिवार ने समापन के बाद प्रसाद वितरण एवं भंडारा कराया
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