आमगांव बड़ा ग्राम बिलोनी में विनोद राजपूत के निज निवास में चल रही रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन सिमरिया कला वाले पंडित चंद्रशेखर कुरचानिया ने कृष्ण-सुदामा मित्रता का प्रसंग सुनाया। श्रद्धालु सुदामा चरित्र सुन भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सच्चा दोस्त वही है जो मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए मदद कर दे। कलियुग में केवल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध होता है, तभी तक मित्रता रहती है। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास ने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारिकापुरी जाते हैं। महल के द्वार पर पहुंचकर प्रहरी को भगवान कृष्ण का मित्र बताकर अंदर जाने की बात कहते हैं। इस पर प्रहरी उनका उपहास उड़ाते हैं। कथा व्यास ने पंडित चंद्रशेखर कुरचानिया ने कहा कि जब एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को पूरा वृतांत सुनाता है तो श्रीकृष्ण नंगे पांव ही सुदामा के पीछे दौड़ने लगते हैं और रोककर सुदामा को गले लगा लेते हैं। प्रभु मित्र सुदामा की दुर्दशा को देखकर इतना दुखी हुए कि प्रभु श्रीकृष्ण के आंखों से निकल रहे आंसुओं से सुदामा के पैर धुल गए राजपूत परिवार ने समापन के बाद प्रसाद वितरण एवं भंडारा कराया
