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संडीला के ब्लॉक सभागार संडीला में संडीला, बेहन्दऱ, कछौना, कोथावा के समस्त परिषदीय प्राथमिक विद्यालय एवं संविलियन विद्यालयों में टेबलेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया टेबलेट वितरण संडीला मे 51, कछौना के 10, बेहन्दऱ के 10, कोथावा के 10 विद्यालय, शेष विद्यालयों को बीआरसी से वितरित किए गए कार्यक्रम मे सांसद अशोक रावत ने कहा की बेसिक शिक्षा में सुधार के लिए हर संभव प्रयास सरकार कर रही है विद्यालयों के अध्यापकों को तकनीक रूप से दक्ष किया जा रहा है ताकि वह आधुनिक तरीके अपना का विद्यार्थियों को पढ़ा सके कार्यक्रम का आयोजन खंड शिक्षा अधिकारी संडीला, बेहंदर,कोथावा,कछौना द्वारा संयुक्त रूप से किया गया मंच का संचालन विक्रांत कुमार द्वारा किया गया कार्यक्रम में एसडीएम तान्या सिंह, खंड विकास अधिकारी धर्मेश चंद्र पांडे, खंड शिक्षा अधिकारी सीमि निगार, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अमित गुप्ता, मंडल अध्यक्ष हर्षवर्धन मिश्रा सहित सभी एआरपी व नोडल संकुल शिक्षक मौजूद रहे
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सण्डीला- कस्बे के रामलीला मैदान में चल रही रामलीला मे श्रीराम-सुग्रीव की मित्रता और लंका दहन का मंचन किया गया। सीता हरण के बाद श्री राम भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता को खोजते हुए पर्वत पहुंचते हैं जहां हनुमान जी से उनका परिचय होता है। उसके बाद हनुमान जी दोनों भाइयों को सुग्रीव से मिलवाते हैं। श्रीराम उन्हें आने का मंतव्य बताते हैं। फिर उनसे रिसमुख पर्वत पर रहने का कारण पूछते हैं। सुग्रीव बताते हैं मेरा भाई बाली मेरे पत्नी को हरण कर मुझे अपने राज्य से निकाल दिया है। तब प्रभु श्रीराम सुग्रीव को बाली से युद्ध करने के लिए बोलते हैं। युद्ध के दौरान श्रीराम बाली का वध कर देते हैं। उसके बाद सुग्रीव का राज्यभिषेक किया जाता है। उसके बाद सीता माता की खोज में हनुमान जी सौ योजन समुद्र लांग लंकापुरी पहुंचते हैं। वहां अशोक वाटिका में माता सीता से उनकी भेंट होती है। उसके बाद वहां पहुंचे राक्षसों को जब हनुमान जी मार देते हैं तब रावण अक्षय कुमार को उन्हें पकड़ने के लिए भेजता है। हनुमान जी से युद्ध में अक्षय कुमार मारा जाता है। तब हनुमान जी को पकड़ने के लिए मेघनाथ को भेजता है। मेघनाथ युद्ध के बाद हनुमान जी को पकड़ कर रावण के दरबार में ले जाता है। यहां हनुमान जी के पूंछ में आग लगाई जाती है तो उस आग से वह लंका जला देते हैं। इस मौके पर कमेटी के संरक्षण गंगासरण गुप्ता, प्रबंधक प्रेम बाबा, अध्यक्ष अभय गुप्ता, चंद्र मोहन आहूजा आदि मौजूद रहे
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सण्डीला- कस्बे के रामलीला मैदान में चल रही रामलीला मे मेघनाध व अहिरावण वध का मंचन किया गया जिसमें कलाकारों ने संजीवनी से लक्ष्मण की मूर्छा खुलती है। इसके बाद लक्ष्मण युद्व में मेघनाद का वध कर देते हैं । मेघनाथ वध के पश्चात पुत्र-वधु के विलाप को सुनकर लंकापति रावण ने आकर कहा- ‘शोक न कर पुत्री। प्रात: होते ही सहस्त्रों मस्तक मेरे बाणों से कट-कट कर पृथ्वी पर लोट जाऐंगे। मैं रक्त की नदियां बहा दूंगा। करुण चीत्कार करती हुई सुलोचना बोली- “पर इससे मेरा क्या लाभ होगा, पिताजी। सहस्त्रों नहीं करोड़ों शीश भी मेरे स्वामी के शीश के आभाव की पूर्ती नहीं कर सकेंगे। सुलोचना ने निश्चय किया कि ‘मुझे अब सती हो जाना चाहिए।’ किंतु पति का शव तो राम-दल में पड़ा हुआ था। फिर वह कैसे सती होती जब अपने ससुर रावण से उसने अपना अभिप्राय कहकर अपने पति का शव मँगवाने के लिए कहा, तब रावण ने उत्तर दिया- “देवी ! तुम स्वयं ही राम-दल में जाकर अपने पति का शव प्राप्त करो। इसके बाद रावण कुभकरण को जगाता है । कुभकरण के पराक्रम से राम सेना में खलबली मच जाती है‘‘नाथ भूधराका रसरीरा । कुंभकरन आवतरन धीरा।’’तब भगवान श्रीराम बाणों से उस पर प्रहार करते है और कुंभकरण का वध कर देते है ।रावण के कहने पर अहिरावण ने युद्ध से पहले युद्ध शिविर में उतरकर राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया। वह दोनों को पाताल लोक ले गया और एक गुप्त स्थान पर बंधक बनाकर रख लिया। राम और लक्ष्मण के अपहरण से वानर सेना भयभीत व शोकाकुल हो गई, लेकिन विभीषण ने यह भेद हनुमान के समक्ष प्रकट कर दिया कि कौन अपहरण करके ले जा सकता है। तब हनुमानजी वेग की गति से पाताल पुरी पहुंच गए। हनुमान ने अहिरावण का वध कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया प्रभु राम अहिरावण का वध कर देते हैं। इस मौके पर कमेटी के संरक्षक गंगा शरण गुप्ता, प्रबंधक प्रेम बाबा, अध्यक्ष अभय गुप्ता, चंद्र मोहन आहूजा आदि मौजूद रहे
