सण्डीला- कस्बे के रामलीला मैदान में चल रही रामलीला मे मेघनाध व अहिरावण वध का मंचन किया गया जिसमें कलाकारों ने संजीवनी से लक्ष्मण की मूर्छा खुलती है। इसके बाद लक्ष्मण युद्व में मेघनाद का वध कर देते हैं । मेघनाथ वध के पश्चात पुत्र-वधु के विलाप को सुनकर लंकापति रावण ने आकर कहा- ‘शोक न कर पुत्री। प्रात: होते ही सहस्त्रों मस्तक मेरे बाणों से कट-कट कर पृथ्वी पर लोट जाऐंगे। मैं रक्त की नदियां बहा दूंगा। करुण चीत्कार करती हुई सुलोचना बोली- “पर इससे मेरा क्या लाभ होगा, पिताजी। सहस्त्रों नहीं करोड़ों शीश भी मेरे स्वामी के शीश के आभाव की पूर्ती नहीं कर सकेंगे। सुलोचना ने निश्चय किया कि ‘मुझे अब सती हो जाना चाहिए।’ किंतु पति का शव तो राम-दल में पड़ा हुआ था। फिर वह कैसे सती होती जब अपने ससुर रावण से उसने अपना अभिप्राय कहकर अपने पति का शव मँगवाने के लिए कहा, तब रावण ने उत्तर दिया- “देवी ! तुम स्वयं ही राम-दल में जाकर अपने पति का शव प्राप्त करो। इसके बाद रावण कुभकरण को जगाता है । कुभकरण के पराक्रम से राम सेना में खलबली मच जाती है‘‘नाथ भूधराका रसरीरा । कुंभकरन आवतरन धीरा।’’तब भगवान श्रीराम बाणों से उस पर प्रहार करते है और कुंभकरण का वध कर देते है ।रावण के कहने पर अहिरावण ने युद्ध से पहले युद्ध शिविर में उतरकर राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया। वह दोनों को पाताल लोक ले गया और एक गुप्त स्थान पर बंधक बनाकर रख लिया। राम और लक्ष्मण के अपहरण से वानर सेना भयभीत व शोकाकुल हो गई, लेकिन विभीषण ने यह भेद हनुमान के समक्ष प्रकट कर दिया कि कौन अपहरण करके ले जा सकता है। तब हनुमानजी वेग की गति से पाताल पुरी पहुंच गए। हनुमान ने अहिरावण का वध कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया प्रभु राम अहिरावण का वध कर देते हैं। इस मौके पर कमेटी के संरक्षक गंगा शरण गुप्ता, प्रबंधक प्रेम बाबा, अध्यक्ष अभय गुप्ता, चंद्र मोहन आहूजा आदि मौजूद रहे
