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योग के महत्व को ध्यान में रखकर ,11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता दी है।इस दिन के बाद से हर वर्ष 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है.. साथियों आइए आज योग दिवस पर हम खुद से वादा करें - जीवन में जितनी भी व्यस्तता और चुनौतियाँ हो, अपने दैनिक जीवन में योग को शामिल करेंगे और जीवन को उत्साह से भर कर शरीर,मन,एवं आत्मा को स्वस्थ रखेंगे।

एक ओर जहां ज्यादातर लोग जल्दी से जल्दी कोरोना की वैक्सीन लगवा लेना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वैक्सीन का ‘विकल्प’ सुझा रहे हैं. वॉट्सएप, टेलीग्राम और कुछ फेसबुक ग्रुप्स में ऐसी चर्चा हो रही है कि वैक्सीन हमारे शरीर में जो एंटीबॉडी बनाती है, वो तो खुश रहने से ही बन जाती है. तो फिर वैक्सीन क्यों लगवाई जाए?

कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान लोगों के बैंक जमा और हाथ में रखी नकदी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. यह बताता है कि महामारी के कारण इलाज पर खर्च से लोगों का अच्छा-खासा पैसा निकला है. रिजर्व बैंक की मासिक पत्रिका में अधिकारियों के एक लेख में यह कहा गया है. इसमें कहा गया है कि एक परिवार की कुल संपत्ति में बैंक जमा की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत होती है.

बिहार राज्य के जमुई जिला के चकाई प्रखंड से सुबोनी बेसरा ने चिराग मोबाइल वाणी को बताया कि उन्होंने तीन महीना पहले राशन कार्ड के लिए आवेदन किया है लेकिन अभी तक राशन कार्ड नहीं बना है

कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर की मार ग्रामीण क्षेत्रों के रोजगार पर भी पड़ी है. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत एक साल के भीतर रोजगार में 48 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है. मई 2020 में जहां योजना के तहत 50.83 करोड़ लोगों को काम मिला था, वहीं अब यह संख्या घटकर 26.38 करोड़ रह गई है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। 

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देश में कोरोना संक्रमण का खतर काफी कम हो गया है, इस बीच सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य पूरा करने में जुटी है. वैज्ञानिकों का दावा है कि जब तक कोरोना वैक्सीन ज्यादा से ज्यादा लोगों को नहीं लग जाती तब तक खतरे का टाला नहीं जा सकता। पूरी जानकारी के लिए लिंक को अभी क्लिक करें।

बिहार में 45 या इससे अधिक उम्र के लोगों के टीकाकरण के लिए जिला प्रशासन की ओर से टीका एक्सप्रेस भी चलाया जा रहा है. लेकिन लोगों के बीच जागरूकता के अभाव की वजह से सरकार की पहल पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही है. सोशल मीडिया और सुनी-सुनाई बातों के चलते इनके बीच फैली वे सारी अफवाहें हैं, जिसके चलते लोग टीकाकरण के दूर भाग रहे हैं। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। 

कोरोना और लॉकडाउन का सबसे अधिक असर मजदूर वर्ग पर पड़ा है. अब रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हजारों बच्चे बालमजदूरी के दलदल में फंस चुके हैं. कोरोना काल में बड़ी तादाद में बच्चों ने अपने मां या बाप में से किसी एक या दोनों को ही खो दिया है. जिसके चलते उनपर घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई है. वहीं कोरोना वायरस की वजह से बंद पड़े स्कूलों की वजह से रोजगार के लिए बड़ी संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।