बिहार राज्य के जमुई जिला सिकंदरा प्रखंड से विजय कुमार मोबाइल वाणी के द्वारा कहते हैं कि प्राचीन समय में बच्चों को संस्कार और ज्ञान देने का काम परिवार करते थे।लेकिन वर्त्तमान समय में यह कार्य परिवार के लोग नहीं बल्कि टेलीविजन कर रहा है।आजकल हर घर में यह देखना बहुत ही सामान्य सा हो चूका है की हमारा पसंदीदा कार्टून चैनेल या कार्यक्रम ये है।जिन घरों में भी छोटे बच्चे होते हैं,वहाँ कार्टून नेटवर्क की ओर खासा आकर्षण देखने को मिलता है।यह कार्टून कार्यक्रम बच्चों के दिमाग और दिल पर गलत प्रभाव डालते हैं।कार्टून कार्यक्रम में दिखाए जाने वाले रहस्य ,चोरी और हिंसा जैसी चीज़ों को देख कर बच्चे उसी काल्पनिक दुनिया को सच मान कर जीने लगते हैं।जिनसे बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है।कार्टून कार्यक्रम का दुष्परिणाम बच्चों में चिड़चिड़ापन और असमाजिक होना ,पढ़ाई की ओर ध्यान ना देना ,कमजोर स्मरण शक्ति के रूप में देखने को मिल रहा है।
