हमारे एक श्रोता महाबीर महतो जी ,बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड से बता रहे हैं कि जिस कलेंडर में गाँधी नहीं वह कैसा कलेंडर ,गाँधी जी के बिना खादी का कोई अस्तित्व नहीं है,सिर्फ हंगामा खड़ा करने से क्या होगा,शीर्षक से लिखे अपने लेख में आदित्य कला ने खादी ग्राम उद्योग के कैलेंडर पर प्रधानमंत्री जी की तस्वीर छपने की घटना का समर्थन किया है।अपने बात को सही ठहराने के लिए उन्होंने कई तर्क दिए,इस सम्बद्ध में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के उस व्यान का जिक्र किया है जिसमे कहा गया है की पूर्व में भी खादी ग्राम उद्योग पर सात बार महात्मा गाँधी जी की तस्वीर नहीं छपी,लेकिन लेखिका ने यह भी नहीं बताया की तब उनके स्थान पर किसी दूसरे की फोटो नहीं छपी थी यह जांच का विषय होना चाहिए।खादी की बिक्री के सम्बन्ध में जो आंकड़े आ रहे हैं उसमे कितनी सच्चाई है क्योकि अब तो नेता भी खादी पहनने से परहेज कर रहे हैं,खादी को बढ़ावा दें ,लेकिन इसे गाँधी जी से दूर नहीं करें,क्योकि गाँधी जी के बिना खादी का कोई अस्तित्व नहीं है।