मध्य प्रदेश राज्य के उमरिआ जिला से शिव कुमार यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को समाज के सामने अपनी बात रखनी चाहिए।यदि कोई महिला नौकरी कर के रिटायर हो गई। मगर समाज में अपनी पहचान नही बनाया है तो व्यर्थ है
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दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
महाराष्ट्र राज्य के नागपुर से आदर्श ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि किसी के साथ भेदभाव नही होना चाहिए। लड़का और लड़की दोनों का बराबर महत्व है।सबको महत्व मिलना चाहिए
महाराष्ट्र राज्य के नागपुर जिला से आदर्श ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लड़कियां देश का भविष्य हैं।चाहे वो किसी भी वर्ग या समुदाय की हों।महिलाओं का अच्छी शिक्षा,अच्छी सेहत ,अच्छी नौकरी और अच्छी सम्पत्ति पर उनका हक है।
मध्य प्रदेश राज्य के उमरिआ जिला से शिव कुमार यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के जनसँख्या के आधार पर उनके देखभाल के लिए एक अधिकारी नियुक्त होना चाहिए। जिसका काम होगा यह देखना कि महिलाओं का किसी तरह से शोषण तो नही हो रहा है। यह अधिकारी स्थानीय ही होना चाहिए। क्योंकि ग्रामीण महिला ग्रामीणों की सुरक्षा अच्छे से कर सकती है
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