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दिल्ली से प्रिंशु पटेल मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को प्रॉपर्टी में हिस्सा मिलना जरूरी है। अगर उनको प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं देंगे तो वह खुद से कमा और खा नहीं पाएंगी। अगर ससुराल में किसी तरह की परेशानी हो गयी या पति की मृत्यु हो गई तो मायके में भी हिस्सा मांग सकती हैं।

दिल्ली से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को जमीन में अधिकार मिलना चाहिए

मध्य प्रदेश राज्य के उमरिआ जिला से शिव कुमार यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बेटी की शादी में दहेज न देकर माता - पिता को जमीन का हिस्सा देना चाहिए।जमीन का टुकड़ा देने के बाद दहेज देना बिलकुल उचित नही है।दुर्भाग्यवश हमारे देश में बिना दहेज के विवाह नही होता है। दहेज न लिया जाना चाहिए और ना ही दिया जाना चाहिए।

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कुल मिलाकर, महिलाओं के लिए संयुक्त स्वामित्व सिर्फ़ काग़ज़ी नियम नहीं है, बल्कि समाज को बदलने का एक मज़बूत ज़रिया है। यह महिलाओं को मज़बूत बनाता है, परिवार में संतुलन लाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए बराबरी की एक अच्छी मिसाल पेश करता है। महिलाओं को ज़मीन और संपत्ति में बराबर हक़ देना एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज की ओर बड़ा कदम है। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- क्या आपके परिवार की ज़मीन या घर महिलाओं के नाम पर भी संयुक्त रूप से दर्ज है? *--- अगर नहीं, तो क्या आप संपत्ति में बेटियों और बहुओं को बराबर अधिकार देने पर विचार करेंगे? *--- क्या आप मानते हैं कि महिलाओं को ज़मीन का अधिकार मिलने से परिवार ज़्यादा सुरक्षित और मज़बूत होता है? *--- क्या अगली पीढ़ी को बराबरी की सीख देने के लिए आप संयुक्त स्वामित्व अपनाना चाहेंगे?

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