दिल्ली के जहांगीरपुरी से देवंती ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनको दुर्गेश के साथ जुड़े बहुत दिन हो गए हैं।मोबाइल वाणी से जुड़कर यह समझ में आया कि प्रॉपर्टी में हिस्सा होना क्यों जरुरी होता है।साथ ही महिला के नाम प्रॉपर्टी होने का महत्व इन्होने अपने पति को भी समझाया।फिर,इनके पति ने 2025 में एक फ्लैट इनके नाम से ख़रीदा।यह जानकर देवंती बहुत ख़ुशी हुई। खुद के नाम फ्लैट होने से इनका आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया है। मोबाइल वाणी के योगदान के लिए इन्होने धन्यवाद दिया।

दिल्ली से नेहा सोनकर ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि दुर्गेश और मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दी गई थी कि लड़कियों के लिए जमीन में हिस्सा होना जरुरी है तथा उनकी भी हिस्सेदारी होनी चाहिए।इससे लड़कियों के अंदर आत्मविश्वास जगता है और उनका भविष्य सुरक्षित हो जाता है।नेहा ने अपने पिता के सामने अपने हक़ की बात रखी एवं भाइयों के साथ खुद के लिए भी प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा होने की इच्छा जाहिर की।पिता ने इनकी बातों को समझा और बात को सही तरीके से समझा।पिता ने माना कि बेटियों के नाम सम्पत्ति में हिस्सा होना चाहिए।फलस्वरूप हाल ही में इनके पिता ने जमीन ख़रीदा था। इस जमीन में भाइयों के साथ नेहा को भी एक हिस्सा मिला।भाइयों के साथ नेहा के पास भी जमीन का एक हिस्सा होने पर नेहा बहुत खुश हैं।मोबाइल वाणी के योगदान के लिए उन्होंने धन्यवाद दिया।

दिल्ली के जहाँगीरपुरी से दुर्गेश श्रमिक वाणी के माध्यम से कहती है कि वो पिछले चार साल से मोबाइल वाणी में काम कर रही है। इन्होने प्रॉपर्टी के प्रोजेक्ट में काम किया और लोगों को जानकारी दी कि महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होना क्यों ज़रूरी है।महिलाओं और बच्चों का भविष्य के लिए प्रॉपर्टी क्यों ज़रूरी है इसकी जानकारी दी। इसके बाद इनके पति ने वर्ष 2024 में एक मकान खरीदा।दुर्गेश ने अपने पति को बताया कि अगर पत्नी के नाम प्रॉपर्टी होगा तो रजिस्ट्री में एक से डेढ़ लाख बच जाता है। जिसके बाद ससुर के इंकार करने के बावजूद भी पति ने प्रॉपर्टी पत्नी के नाम करवाया। अब दुर्गेश को अपनी जिंदगी सुरक्षित लगती है। अगर आगे कुछ होगा तो इनके पास एक छत रहेगा और बच्चों को दर दर भटकना नहीं पड़ेगा।

दिल्ली से खुशबु मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि उन्होंने मोबाइल वाणी सुना और उन्हें जानकारी मिली की पिता की सम्पत्ति पर बेटी का भी अधिकार उतना ही होता है, जितना की उसके भाई का। इस जानकारी को सुनने के बाद खुशबु ने अपने पिताजी से जमीन में हिस्सा देने की बात कही। खुशबु के पिताजी ने कहा की भाई से बात करते हैं। जब भाई से बात की गई तो भाई ने नाराज हो कर कहा की तुम्हारी शादी में हमने बहुत खर्च किया है। अब जमीन में क्यों हिस्सा दें। ये सब सुनने के बाद खुशबु ने अपने परिवार वालों से कहा अगर हमें हिस्सा नहीं मिलेगा तो हम कोर्ट का सहारा लेंगे। इस बात को सुनने के बाद पिताजी और भाई ने खुशबु को जमीन में हिस्सा देने का फैसला किया। अब खुशबु का भी नाम उनके पिताजी के जमीन में डलवाया गया है

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दिल्ली से हसमत अली ने मोबाइल वाणी के माध्यम से पैतृक सम्पत्ति में अधिकार के बारे में ललिता देवी से बातचीत किया। ललिता देवी ने बताया कि ससुराल की जमीन में महिला का पूरा अधिकार होता है।लेकिन मायके की जमीन में अधिकार नही होता है। मायके की जमीन में भाइयों का हक़ होता है। मांगने पर भाइयों से रिश्ता बिगड़ सकता है। इसलिए सभी लड़कियों से इनका अनुरोध है कि मायके की जमीन में हिस्सा नही लेना चाहिए।माता - पिता आज है कल नही रहेंगे। रिश्ता भैया और भाभी से चलता है।जमीन में हिस्सा लेने पर मान - सम्मान सब ख़त्म हो जाएगा