दिल्ली के सुन्दर नगरी से आनंदी की राय है कि बेटियों को मायके और ससुराल से उनका हक़ मिलना चाहिए।ना बेटी मायके की होती है न ससुराल की। ससुराल में उसे पराया समझा जाता है और शादी के बाद मायके में उसे पराया समझा जाता है। तो ऐसे में अगर कोई दिक्कत परेशानी या मजबूरी आ जाती है बेटी कहाँ जाए? इसलिए बेटी को ससुराल और मायके दोनों जगह से बराबर का हक़ और दर्जा मिलना चाहिए