दिल्ली के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि कोरोना काल में कई शिक्षण संस्थान बंद हो गए। ऐसे में संस्थानों का किराया जमा करना मुश्किल हो गया। भरण पोषण के लिये कई शिक्षक तो कंपनियों में काम करने लग गए। कोरोना काल ने शिक्षकों को बहुत कुछ सीखा दिया
