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जम्तारा से संजय माझी झारखण्ड मोबाइल वाणी के मध्यम से घरेलु हिंसा के अधिनियम के बारे में जानकारी दे रहे है,इस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति का मानसिक या शारीरिक या भावनात्मक शोषण किया जाये तो यह घरेलु हिंसा है इसी प्रकार किसी महिला को दहेज़ के लिए प्रताड़ित करना भी घरेलु हिंसा है

जम्तारा:बादल बारी झारखण्ड मोबाइल वाणी में यह सन्देश दे रहे है कि हमारे इलाके में सबसे बड़ी समस्या है शिक्षित बेरोजगारी कि यह आज सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। आज हमारे अगल बगल में कोई भी स्कूल नहीं है इसके लिए 15-16 किलोमीटर जाना पड़ता है उतना कष्ट सह कर भी अगर नौकरी नहीं मिलते है तो सब बेकार है। सरकार आज तरह तरह कि रोगजार निकल रही है पर उसके लिए बैंक ड्राफ्ट देना पड़ता है लेकी अभी तक रोजगार का कोई भी स्रोत नहीं है।बोला जाता है कि झारखण्ड में हर तरह कि सुविधा है लेकिन आज कि सबसे बड़ी समस्या शिक्षित बेरोजगारी है। अगर आज सरकार शिक्षित बेरोजगार का मुदद उठे तभी हम झारखण्ड का नाम ऊंचा उठा सकते है।तभी हमें सब तरह का सुख मिल सकता है। हम आज BA Bed करके भी मजदूरी का काम करते है। इससे सरकार को शर्मिंदा होना चाहिए।

जामतारा,नाला से संजय कुमार मांझी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि अभी चुनावी सरगर्मी चल रहा है लोग सोच रहे हैं की किसे वोट देनी चाहिए। इस पर ग्रामीण कहते हैं की हम उसे चुनेगे जो इमानदार हो जो समाज का विकास करे।

संजय कुमार मांझी जामताड़ा,नाला प्रखंड से झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दे रहे है की झारखण्ड के सरकारी स्कुलो में शिक्षको का घोर आभाव है.अधिकतर स्कुल पारा शिक्षक के भरोसे चल रहे है और जो भी ग्राम स्तर पर पारा शिक्षक का चुनाव किया गया है उन्हें सरकार फिर से परीक्षा लेकर भर्ती करे जिससे शिक्षको की पढ़ाने की गुणवत्ता में सुधर होगा क्योंकि जब शिक्षा को ही कुछ नहीं आयेगा तो वे बच्चो को क्या पढ़ाएंगे।सरकार इस पर पुनर्विचार करे.

संजय कुमार मांझी जामताड़ा,नाला प्रखंड से झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दे रहे है की झारखण्ड के सरकारी स्कुलो में शिक्षको का घोर आभाव है.अधिकतर स्कुल पारा शिक्षक के भरोसे चल रहे है और जो भी ग्राम स्तर पर पारा शिक्षक का चुनाव किया गया है उन्हें सरकार फिर से परीक्षा लेकर भर्ती करे जिससे शिक्षको की पढ़ाने की गुणवत्ता में सुधर होगा क्योंकि जब शिक्षा को ही कुछ नहीं आयेगा तो वे बच्चो को क्या पढ़ाएंगे।सरकार इस पर पुनर्विचार करे.

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