एक सकारात्मक सोच जिन्दगी बदल सकती है. सकारात्मक सोच से जहां हमारी मुश्किलें बेहद कम लगती हैं, वहीं हमे हौसला भी मिलता है.एक आम आदमी छोटी छोटी बातों पर झुंझला उठता है तो ज़रा सोचिये उन लोगों का जिनका खुद का शरीर उनका साथ छोड़ देता है, फिर भी जीना कैसे है कोई इनसे सीखे, कई लोग ऐसे है जिन्होंने दिव्यांगता जैसी कमज़ोरी को अपनी ताकत बनाया है।दोस्तों, दिव्यांगों के लिए सरकार द्वारा हर स्तर पर कार्य किये जा रहे हैं उनकी सहायता के लिए कई योजनाएं भी निकाली गई है लेकिन क्या उन योजनाओं का लाभ दिव्यांग व्यक्तियों तक आसानी से पहुंच पा रही है..? साथ ही दिव्यांग उन योजनाओं का लाभ किस प्रकार से ले रहें हैं...?दोस्तों आपके क्षेत्र में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में उन्हें किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है..? साथ ही हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि क्या आपके आस-पास कोई दिव्यांग किस प्रकार से खुद को आत्मनिर्भर बना रहे हैं और उनके हौसले को देख कर आपको क्या सन्देश मिल रहा है..?

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जैसा की आप सब ने बताया की वर्षा जल संचयन के बहुत सारे पारम्परिक तरीके है, पर संचयन के बाद ​​आप ​इस पानी का इस्तेमाल ​ कैसे करते हैं ?​ ​क्या आप संचित जल का उपयोग सिचाई ​या ​मछली पालन के लिए करते हैं या फिर किसी ​और​ काम के लिए ? ​वैसे आप को पता तो है न की ठहरे हुए साफ पानी में मच्छर भी पनप सकते है ? तो ऐसे में, पानी को मच्छर के प्रजनन भूमि बनने से रोकने के लिए आप क्या करते है ?​ ग्रामीण इलाकों में सिंचाई या मछली पालन तो हो सकता है पर अगर कोई शहरी क्षेत्र में रहते है या फिर ऐसी स्थिति में रहते है जहाँ खेती और मछली पालन संभव नहीं है वे वर्षा जल का और किस तरीके से उपयोग कर सकते है ? क्या आप ने कुछ अलग तरीके से इस पानी को उपयोग करने की कोशिश की है ? आप को क्या लगता है, आप की कोशिश लोगो के ज़िन्दगी में बदलाव लेन में कितनी शक्षम होगी?

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