झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से जे एम् रंगीला ने मोबाइल वाणी के माध्यम से फूलमती देवी से बाल विवाह के विषय में साक्षात्कार लिया।फूलमती देवी ने बताया कि देश में बाल विवाह संस्कृति और सभ्यता से जुड़ा है।सतयुग,द्वापर,युग और त्रेता युग में भी बाल विवाह होती थी। वर्तमान समय में उसका उपयोग न कर के लोग पश्चमी सभ्यता का उपयोग कर रहे हैं। जिसके कारण बाल विवाह को रोकना असंभव हो गया है। बाल विवाह के कई दुष्परिणाम हैं।अगर किसी लड़की की अठारह वर्ष से पहले विवाह हो जाता है, तो उसके साथ कई तरह दोहन किया जाता है।वे अपनी जिम्मेवारी को सही से नहीं निभा पाती हैं और ऐसे में यदि समय से पहले बच्चा हो जाता है तो जच्चा और बच्चा दोनों को कई तरह के नुकसान का सामना करना पड़ता है। इस प्रथा के कारण नारी का अस्तित्व खत्म हो जाता है।