Transcript Unavailable.

Transcript Unavailable.

Transcript Unavailable.

Requesting KN user Marimuthu from Erode to call him.

He wants to know about a government document making

Transcript Unavailable.

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को भूमि स्वामित्व प्राप्त होने का अल्पकालिक और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ पूरे समुदाय में व्यापक रूप से दिखाई देते हैं । नेपाल के गंधगी प्रदेश में स्थित बनपाले समुदायिक वन उपयोगकर्ता समूह में सामुदायिक वन में महिलाओं को व्यक्तिगत अधिकारों को अनिवार्य प्रावधान के कारण एक समुदाय समृद्ध हुआ है । वन तक महिलाओं की पहुंच ने उन्हें अप्लम फल की कटाई प्रसंस्करण और बिक्री का एक छोटा सा व्यवसाय स्थापित करने में सक्षम बनाया है ।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि सामूहिक स्वामित्व वाली भूमि में महिलाओं के भूमि स्वामित्व अधिकारों की संभावनाओं का पता लगाने के लिए डब्ल्यू आर आई ने पांच देशों के पांच समुदायों का अध्ययन किया । महिलाओं के पास मजबूत और सुरक्षित भूमि स्वामित्व है । कैमरून और नेपाल में दो सामुदायिक वन समूह इंडोनेशिया और मैक्सिको में दो स्वदेशी समुदाय और जॉर्डन में एक पशुपाल समुदाय है ।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि विश्व भर में पच्चीस लाख लोग ऐसे हैं जो अपनी आजीविका ,सामाजिक संबंधों और संस्कृतिक पहचान के लिए सीधे तौर पर सामूहिक भूमि स्वामित्व और प्रणाली पर निर्भर है ।सामूहिक भूमि स्वामित्व प्रणाली समुदायों या लोगों का ऐसे समूह हैं जो भूमि के उपयोग और प्रबंधन के अधिकारों को साझा करते हैं ।समूह अधिकार के अतिरिक्त कुछ सामूहिक स्वामित्व प्रणालियों में समुदाय के प्रत्येक सदस्य को विशिष्ट संसाधनों और भूमि पर विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं ।अधिकांश स्वदेशी और पारंपरिक समुदाय सामूहिक स्वामित्व के अंतर्गत भूमि धारण करते हैं ।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में महिलाओं की भूमि अधिकार में धीरे धीरे भागीदारी बढ़ रही है ।कानूनी सुधारों संयुक्त स्वामित्व और सामाजिक आर्थिक सशक्तिकरण जैसे -सेवा भारत का काम ।इस माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है दो हजार पांच के उत्तराधिकार कानून के बाद बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार मिला है । यह अधिकार उन्हें आर्थिक संतरता , निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है । बहुत सारे महिलाओं को इसके बारे में जानकारी भी है की बेटी को भी बेटे के बराबर का हिस्सा हमारे भारत के कानून के द्वारा दिया गया है ।इस चीज को जानकारी होना चाहिए तभी महिलाएं अपना अधिकार के लिए आगे बढ़ेंगी ।महिलाओं को सामूहिक रूप से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना चाहिए ।