Rajesh Kumar Pathak from Delhi extends his greetings and best wishes to all Hamari Vaani listeners, volunteers, staff, and the technical team on the occasion of the first Monday of the Shravan month. He wishes everyone good health, happiness, and prosperity. He also appreciates Swagat Sir for personally informing users about the technical issues on the platform and acknowledges the efforts of the Hamari Vaani team in addressing the situation.
Information shared about useless bus pass in Pondicherry & thanking users & KN
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Speaking about some number with munnalal. cannot make out what he is saying
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जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। आप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने और उन्हें सीखाने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाते है? इस बारे में 'बचपन मनाओ-बढ़ते जाओ' कार्यक्रम सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए फोन में दबाएं नंबर 3.
हमारा जन्म मां के गर्भ में होता है, गर्भ में संपूर्ण शारीरिक विकास की प्रक्रियां में हम गर्भ की नाल से जुड़े होते है, यह हमें सुरक्षित रखता है। क्यों कि तब हम पूर्णतः स्वतंत्र होते है, किसी वस्तू की जिज्ञासा नहीं होती है, न भविष्य की कल्पना, न अतित की चिंता होती है। लेकिन जैसे ही मां की गर्भ से बहार आते तब हमारी नाल काटी जाती है तब हमारा संबंध में मा के गर्भ की बहार की दुनिया से जुड़ता है। जहा जिज्ञासा, भविष्य की कल्पना, अतित की चिंता से लेकर अस्तित्व का विषय जुड़ जाते है। गर्भ में हम सुरक्षित महसूस करते थे, लेकिन जैसी ही गर्भ के बहार नई दुनिया में प्रवेश करते तब स्वंय को असुरक्षित महसूस करते है। मां के गर्भ से निकला शिशु प्रारंभिक अवस्था में सामन्य आवाज में भी भयभीत होता है, आवाज की ध्वनी अधिक हो तो वह रोने लगता है। मां के गर्भ से बहार निकलने के बाद शिशु का ब्रेन सामन्यतः पूर्ण खाली होता है, असुरक्षा की भवाना उसके ब्रेन के अर्धचेतन अवस्था में रिकार्ड होने लगती है। इसी असुरक्षा की भावना से भय की शुरूआत यही से होती है।
