राज्य मध्य प्रदेश कुड्डम से आमला मार्ग पर एक नाले पर पिछले डेढ़ साल से पुलिया का निर्माण अधुरा पड़ा है । स्थानीय आवागमन प्रभावित हो रहा है। आवागमन के लिए डायवर्सन की व्यवस्था जानलेवा साबित हो रही है । बड़े वाहनों के आवागमन प्रतिबंध लगाने से उन्हें छिदवाडा मार्ग से जोबनी खापा पहुंचने के लिए लगभग 30 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है । प्रधानमंत्री सड़क योजना की सडक से चार पंचायतों के 20 ग्रामो का आवागमन प्रभावित हो रहा है ।डेढ़ साल से कछुआ गति से पुलिया निर्माण के कारण भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। छिंदवाड़ा सड़क पर आमला डिपो से पश्चिम दिशा में तीन किलोमिटर दूर आमला ग्राम के पास खापा की ओर मार्ग पर 700 मीटर दुरी पर पुल बनाया जा रहा है ।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बालाघाट आगमन पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज रेंजर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता कर बालाघाट जिले को ₹761 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे। Dr Mohan Yadav

टी.बी. बीमारी क्या है।आप इस बिमारी की रोकथाम और बचाव हेतु आज हमारे साथ सौंसर सिविल अस्पताल से सिनियर टीटमेन सुपरवाइजर सुरेश सोमकुवर सर से विशेष बातचीत मोबाइलवाणी पर

मलेरिया बीमारियों की रोकथाम एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया की रोकथाम के साथ लार्वा रोकने के लिए किया जा रहे, प्रयास पर आज हमारे साथ सौंसर सिविल अस्पताल से मलेरिया निरीक्षक सुरेश आगरकर सर से विशेष बातचीत कर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

योगेश गौतम ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि देश के किसान एक बार फिर नाराज दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले साल नवम्बर 2020 मे किसानो ने केन्द्र सरकार के द्वारा लागू किये गए तीन कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था। और इसके बाद अगले साल 19नवम्बर 2021 को केन्द्र सरकार ने तीनों कानून वापस ले लिए थे। आज हमारे साथ लोकंतात्रिक समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ और वरिष्ठ पत्रकार जावेद उस्मानी ने मोबाइलवाणी पर अपनी प्रतिक्रिया साझा किया । जावेद उस्मानी ने बताया कि जहां अरबपति अपने सामान के मूल्य खुद तय करते हैं,जिसमे उनका मुनाफा भी शामिल रहता है, वहीं दुर्भाग्यवश मेहनतकश किसान इस लाभ से वंचित हैं। बातचीत सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें और सुनें पूरी बात ।

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बसंत का आगाज पलास के फूल साथियों बसंत की सुरुवात हो चुकी है और मेरे गांव से लगे खेतों की मेड़ पर पलास को फूल आना सुरु हो रहा है। तो आज मोबाइल वाणी पर हम बात करते हैं पलास के पेड़ और फुलों पर (पलास, छूल, परसा, ढाक, टेसू, किंशुक, केसू) एक वृक्ष है. इसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं. भारतीय मास माघ और फागुन में यह केसरी फूलो की बहार में पूरा ढंक जाता है । और वनश्री की शोभा में अनेरी बहार ला देता है । इसके आकर्षक फूलों के कारण इसे "जंगल की आग या flame of forest" भी कहा जाता है. पलाश का फूल उत्तर प्रदेश और झारखण्ड का राज्य पुष्प है. यह पेड़ मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र में पाये जाते हैं । पलाश के पेड़ का हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है. हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों में पलाश के पत्ते, लकड़ी और फूलों का उपयोग किया जाता है. पलाश के फूल, बीज और गोंद का इस्तेमाल कई बीमारियों को ठीक करने में किया जाता है. पलाश के फूलों का अर्क शरीर की सूजन में आराम दिलाता है. पलाश की गोंद एसिडिटी कम करने में और शक्ति बढ़ाने में मदद करता है. यह मुखरोग तथा खाँसी में फायदेमंद होता है. पत्ते सूजन कम करने में तथा वेदना को कम करने वाला होता है.

गुर्वेजी की डायरी पर सुरज धवले से विशेष बातचीत