झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को अधिकार न मिलने से कई समस्याएं उत्पन्न हो रही है। सरकार महिलाओं के लिए योजनाएं बनाती है और फंड जारी कर देती है।मगर महिलाओं तक वह राशि नही पहुंच पाता है।पंचायत के मुखिया,सरपंच और सचिव का दायित्व होता है सरकारी योजनाओं का लाभ लाभुक तक पहुंचना और जानकारी देना।पंचायत के सदस्य महिलाओं को ना जानकारी देते हैं और ना ही योजनाओं का लाभ लेने में मदद करते हैं।इस प्रकार महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के लिए राज्य और केंद्र सरकार संयुक्त योजनाएं चलाई चलाती है। इनमें पहला है,विधवा पेंशन योजना।इसमें केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर विधवा महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। दूसरा,कन्या सुमंगला योजना है। बालिका के जन्म से लेकर पढ़ाई तक आर्थिक सहायता दिया जाता है। तीसरा,लाडली लक्ष्मी योजना है। इस योजना में बालिकाओं के जन्म और शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाता है। शक्ति सदन योजना,इसमें संकट ग्रस्त महिलाओं के लिए आश्रय और पुनर्वास प्रदान करती है। ये योजनाएं न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाती है बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाती है। जिससे वे जीवन के हर क्षेत्र में आगे पढ़ सकें।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से सरजू साव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से केंद्र सरकार की प्रमुख महिला कल्याण योजनाओं के बारे में जानकारी दिया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान करती है।महिला समृद्धि योजना सफाई कर्मचारी महिलाओं को व्यवसाय के लिए एक लाख तक ऋण की सुविधा देती है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से सोनू कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में केंद्र और राज्य सरकारें महिलाओं के सशक्तिकरण,स्वास्थ्य,शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए कई योजनाएं चलाती है।प्रमुख योजनाओं में सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना,उज्ज्वला योजना,महिला समृद्धि योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनाएं शामिल हैं।ये योजनाएं महिलाओं को आर्थिक सहायता,सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करती है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राजकुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम उन्नीस सौ छप्पन के धारा चौदह के तहत परिवर्तित होने के कारण महिलाएं प्राथमिक उत्तराधिकारी के रूप में पति की संपत्ति की हकदार है और उसके हिस्से की राशि उनके बेटे के हिस्से के समान है। यह हिस्सा काल्पनिक विभाग द्वारा निर्धारित किया गया है और वह प्रथम श्रेणी की पूर्ण उत्तराधिकारी के रूप में हक़दार हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को भूमि में अधिकार नहीं मिलनसे से कई तरह समस्या होती है। भारत में महिलाओं को भूमि अधिकार ना मिलने के यह कारण हैं कि पारम्परिक पित्रसतात्मक, सामाजिक रीति रिवाज और कानूनी जागरूकता की कमी है। जमीन अमूमन पिता से पुत्र को दिया जाता है जिससे अस्सी प्रतिशत से अधिक कृषि का कार्यो में योगदान के बावजूद महिलाएं भूमिहीन रहती हैं। इससे उन्हें आर्थिक संतरता, ऋण और सरकारी कृषि सब्सिडी से वंचित होना पड़ता है। जिससे वे अधिक असुरक्षित है। अभी लगभग अस्सी प्रतिशत महिलाएं खेती पर निर्भर रहती हैं फिर भी उन लोगों को भूमि का अधिकार नहीं मिलता है। इसलिए उन लोगों को भूमिहीन माना जाता है। इसके कारण महिलाओं को लोन ,योजनाओं का लाभ और सब्सिडी भी नहीं मिल पाता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राजकुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कृषि में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद भूमि पर मुख्य रूप से अधिकार पुरुषों के पास ही हैं ।जिससे सरकारी योजनाओं और आर्थिक सशक्तिकरण तक महिलाओं की पहुँच सिमित हो जाती है

विष्णुगढ़ प्रखंड के खरकी पंचायत अंतर्गत बलकमक्का राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शनिवार को सेवानिवृत शिक्षक दशरथ महतो का भावभीनी विदाई समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया श्री महतो 23 वर्षों तक हुए विद्यालय में सेवा दिए इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से पंचायत समिति सदस्य विनोद सोरेन वार्ड सदस्य निरंजन महतो वार्ड सदस्य प्रतिनिधि प्रेमचंद महतो समाजसेवी दिलचंद महतो स्कूल अध्यक्ष बलदेव महतो प्रधानाध्यापक बैजनाथ राम कामेश्वर पांडे चुरामन महतो फूलचंद गंझू अर्जुन ठाकुर सोनाराम मांझी सुरेश हांसदा सुरेंद्र महतो समेत बड़ी संख्या में विद्यालय कमी छात्र-छात्राएं व ग्रामीण मौजूदथे।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग से गीता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि किसानों का शहरों की ओर पलायन  कम आय, शिक्षा और  स्वास्थ्य समस्याओं  से उपजी समस्या है, जबकि गाँव में ही कृषि का विकल्प,जैसे- फूड प्रोसेसिंग, जैविक खेती, पशुपालन,इत्यादि खोजना एक दीर्घकालिक और बेहतर समाधान है। लेकिन,अचानक खर्चे के लिए पैसे चाहिए और इस जरूरत के लिए मौसमी पलायन भी जरूरी हो जाता है। कृषि का विकल्प गाँव में खोजना एक स्थायी समाधान हो सकता है। कम पानी वाली फसलों को लगाया जा सकता है। गाँव के पास ही कृषि से जुड़े छोटे उद्योग (जैसे- दूध डेयरी, अचार-पापड़, जूट लगा सकते हैं। मछली पालन, मधुमक्खी पालन, या जैविक खेती भी किसानों के लिए एक उत्तम विकल्प है।