झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कानून और अम्ल के बीच अंतर् - मजबूत कानूनी प्रावधान जैसे एससी एसटी अधिनियम के बावजूद जमीनी स्तर पर उन्हें लागू करना मुश्किल है। सामाजिक संस्कृति बाधाएं - इसमें जाति आधारित पदानुक्रम और सामाजिक बहिष्कार उन्हें न्याय और संसाधनों से दूर रखता है। आर्थिक निर्भरता -इसमें भूमिहीनता और खेतिहार मजदूर होने के कारण वे और भी शोषित होती हैं। कानून की सहायता जैसे दलित और आदिवासी अधिकार पहल जैसे संगठन कानूनी सहायता और जागरूकता प्रदान करती हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि दलित महिलाओं की स्थिति बहुत ही गंभीर हो गई है। अधिकांश दलित परिवार भूमिहीन या छोटे किसान 91 प्रतिशत ऐसी परिवार भूमिहीन या सीमांत ज्योत वाले हैं और 61 प्रतिशत दलित महिलाओं खेतिहार मजदूर हैं। वे अक्सर यौन शोषण और खतरनाक परिस्थितियों में काम करने -जैसे पत्थर की खदाने के प्रति संवेदनशील होते हैं। जिससे उनकी गतिशीलता सीमित होती है। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में मौखिक, शारीरिक और यौन हिंसा का समान सामना करते हैं जो जाति और लिंग आधारित पदानुक्रम से जुड़ी हैं। पंजाब में सहकारी खेती और भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष और तेलंगाना में भूमि अधिकारों की मांग जैसे आंदोलन कर रही हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि दलित और आदिवासी महिलाओं के भूमि सम्बन्धी मुद्दे बहुत ही गहरे हैं। जिसमें भूमिहीनता ,बेदखली और श्रम शोषण प्रमुख हैं। जिससे वह गरीबी हिंसा और सामाजिक बहिष्कार का शिकार होती हैं जबकि कानूनी अधिकार होने के बावजूद उन्हें भूमि पर मालिकाना हक मिलना मुश्किल होता है। जिससे उनके पारमपरिक जीवन और संसाधनों पर खतरा मंडराता रहा है। महिला अक्सर समाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर होती है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि देश में लगभग 80 परसेंट लोग कृषि पर निर्भर हैं।किसानों को फसल उगाने में जितना पूंजी लगता है उतना बेचने पर भी मूल्य नहीं निकल पाता है।किसानों का कहना है कि फसल उगाने में कई तरह परेशानियां आती हैं। कई जगह फसल में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। फसल में पानी के कमी होने के कारण वह अच्छी तरह से तैयार नहीं हो पाता है और कभी कभी जरूरत से अधिक बारिश होने पर भी फसल खराब हो जाता है

विष्णुगढ़ प्रखंड के जोबर पंचायत भवन परिसर में शनिवार को प्रशासन के द्वारा उपलब्ध कराए गए 75 जरूरतमंद बुजुर्ग असहाय के बीच कंबल वितरण किया गया।इस अवसर पर मुखिया चेतलाल महतो पंचायत सचिव रामानंद प्रसाद पंचायत स्वयंसेवक चंद्रशेखर महतो नागेश्वर महतो पंचायत समिति सदस्य कैलाश महतो उमेश मंडल समेत कई लोग मौजूद थे।

विष्णुगढ़ प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी प्रभारी पीयूष कुमार के अध्यक्षता में प्रखंड सभागार भवन में शुक्रवार को विष्णुगढ़ एवं टाटीझरिया प्रखंड के सभी पीडीएस संचालकों के बीच 4Gई पोस मशीन का वितरण किया गया।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं और लड़की के खिलाफ भेदभाव पर कार्य समूह क्या है?लोकतंत्र,शांति, न्याय,सतत विकास और सर्वाधिकार सुरक्षा के लिए महिलाओं के भूमि अधिकार महत्वपूर्ण है।महिलाओं के लिए सुरक्षित भूमि अधिकार ऐसे शक्तिशाली और निरंतर सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करते हैं जो लैंगिक समानता और सतत विकास लक्षों तथा मानवाधिकार की एक विस्तृत श्रृंखला को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।फिर भी भूमि पर अधिकारों और पहुंच से समबंधित मानवाधिकार उल्लघनों के केंद्र में महिलाएं ही रही हैं।भेदभाव पूर्ण कानून और सामाजिक मापदंड महिलाओं की भूमि तक पहुंच को बाधित करते है। भूमि स्वामित् की असुरक्षा से महिलाएं अधिक बुरी तरह प्रभावित होती है। कानून और व्यवहार में महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव के मुद्दे पर गठित कार्य समूह जिसे दो हजार उन्नीस में महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध भेदभाव पर कार्य समूह के रूप में नाम दिया गया

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के सामूहिक भूमि अधिकार परिवारों और समुदायों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। जब महिलाओं को भूमि पर अधिकार और पहुँंच प्राप्त होती है तो इसका आर्थिक लाभ उनके परिवारों और समुदायों तक पहुँचाता है। शोध से पता चलता है कि पुरषों की तुलना में महिलाएं अपने कृषि और भूमि आधारित आय का अधिक हिस्सा अपने परिवार के लिए योगदान करती है।जिसके परिणामस्वरूप खाद्य सुरक्षा और बच्चे के स्वास्थ्य एवं शिक्षा में सुधार होता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कुछ समुदाय में महिलाओं को केवल अपने पतियों या पुरुष रिश्तेदारों से प्राप्त सामुदायिक भूमि तक ही पहुंच प्राप्त होती है। जो अक्सर उनकी वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है। इससे महिला का भूमि स्वामित्व असुरक्षित हो जाता है।जिसका अर्थ है कि पति की मृत्यु या तलाक होने पर वह भूमि पर अपना अधिकार खो सकती है। जिससे वह और उसके बच्चे गरीबी में धकेल दिए जा सकते हैं। कृषि श्रम बल में महिलाओं की अच्छी खासी हिस्सेदारी है लेकिन कृषि भूमि मालिकों को उनकी संख्या अल्पसंख्यक है। यहाँ तक की जब उन्हें भूमि का अधिकार प्राप्त होता है तब भी उनके भूखंड अक्सर दूसरों के भूखंडों की तुलना में छोटे और कम गुणवत्ता वाले होते हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं अपने समुदाय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।पारम्परिक रूप से जीविका चलाने वाली उत्पादक है और घरेलू उपयोग या अतिरिक्त आय के लिए पानी,जलाऊ लकड़ी, चारा,जंगली पौधे और जड़ी बूटियां जैसे प्राकृतिक संसाधन को इकट्ठा करने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।फिर भी सभी स्वदेशी और पमंपरिक समुदाय सामूहिक रूप से महिलाओं के भूमि अधिकारों को मान्यता नहीं देती है।महिलाएं कृषि कार्य में लगी रहती हैं। लेकिन इन्हें पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा नही दिया जाता है।