झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ससुराल में पति के नाम जो भी संपत्ति होता है उसमे पत्नी का भी अधिकार होता है लेकिन पति के माता और पिता के नाम पर किया हुआ संपत्ति पर बहु का अधिकार कानूनी रूप से नहीं होता है। पैतृक संपत्ति में बहु को भी बराबर का अधिकार होता है। अगर सास द्वारा बहु को प्रताड़ित किया जाता है तो बहु सास के खिलाफ शिकायत कर सकती हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ससुराल में महिलाओं को कई तरह के अधिकार दिए जाते हैं जैसे समान भरण पोषण का अधिकार और पति के संपत्ति में हिस्सा देना ।उनको ससुराल के घर में रहने का अधिकार होता है और घरेलू हिंसा से सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक है ।इसके लिए महिला कानून का सहारा ले सकती हैं ।घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत ससुराल के साजे के घर रहने का अधिकार होता है ।पति के संपत्ति में पत्नी का पूरा अधिकार होता है ।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत की दस महिला स्वतंत्रता सेनानी ने इतिहास को आकार दिया है। जिनका नाम जो है - रानी लक्ष्मी बााई,बेगम हजरत महल,कस्तूरबा गाँधी,विजय लक्ष्मी पंडित, सरोजिनी नायडू,अरुणा आसाफली, मैडम भीकाजी कामा,कमला चटोपाध्याय,कितर चन्नमा और साविती भाई फुले। इन दस महिलाओं के द्वारा भारत में स्वतंत्रता,न्याय और समानता के लिए संघर्ष करने वाली साहसी महिलाओं का लंबा इतिहास है। रानी लक्ष्मी बााई से लेकर सरोजिनी नायडू तक भारत में सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानी हुई।जिन्होंने देश की स्वतंत्रता में अमूल्य योगदान दिया।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सावित्री बााई फूले एक भारतीय समाज सुधारक थी जिन्होंने भारत में महिलाओं और निम्न जातियों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यो और जाति व्यवस्था के खिलाफ उनके संघर्ष के लिए जाना जाता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को भूमि से बेदखल कर दिया जाता है। कभी कभी तो उनकी जान को भी खतरा होता है। भूमि का अधिग्रहण मिलने के बावजूद महिलाओं को पुरुषों द्वारा किए जाने वाले उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। कई महिलाओं के पास भूमि है लेकिन उनको भूमि एक बोझ जैसी लगती हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से गीता सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को जमीन में हक़ मिलना चाहिए। संपत्ति के अधिकार से महिलाओं को वंचित कर दिया जाता है। जिस दिन महिलाओं को संपत्ति में अधिकार होगा तो उनका एक पहचान होगा

Transcript Unavailable.

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि एसएलआईसी दलित समुदाय के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक प्रणाली का उपयोग करता है। दलित समर्थक सरकारी नीतियों और योजनाओ का निर्माण ऐतिहासिक कानूनी निर्णयों के कारण बढ़ते दबाव का परिणाम है। दलित आबादी को अक्सर शारीरिक श्रम और सफाई आदि जैसे - मानव मल, पशु शव आदि का निपटान करने के लिए मजबूर किया जाता है। दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले से महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया हैं। जिसमें न्यायालय ने सरकार को दिल्ली में शीवर कर्मचारियों की सुरक्षा स्थितियों में सुधार करने का निर्देश दिया है। हालाँकि इस मामले का दलित समुदाय पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। यह भी निर्देश दिया गया कि राज्य को आपातकालीन आधार पर सीवर सफाई के लिए व्यक्तियों को रोजगार के पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य पूरी तरह से रखना चाहिए।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि दलितों आदिवासियों के विरुदध अस्पृशता और भेदभाव की प्रथ है। वह असंगठित श्रम जैसे - प्रवासी श्रम ,श्रमिक बंधुओ ,मजदूरी और बाल श्रम आदि जैसे पर निर्भर है।दलित आदिवासी महिलाओं के अधिकार -अंतरजतीय अंतर्गोत्ररीय विवाह में दम्पतियों के अधिकारों की रक्षा, दलित आदिवासी भूमि अधिकार ,सकारात्मक कारवाही ,सुरक्ष्मातक भेद भाव ,दलित आदिवासी आबादी से सम्बंधित विशेष विकास योजनाएं बननी चाहिए।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि एसएलआईसी दलित और आदिवासी आबादी के लिए न्याय तक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से प्रभावित समुदाय के साथ मिलकर कानूनी सहायता केंद्र स्थापित करने का काम करती है। इस कार्य का एक माह तक पूर्ण हिस्सा प्रशिक्षण कार्यकर्मों और दलित आदिवासी अधिकारों और कानूनों पर स्थानीय भाषाओं में प्रकाशनों के माध्यम से इन हासिए पर पड़े समुदाय को मौलिक अधिकार के बारे में जागरूक करना है । एसएलआईसी का महत्वपूर्ण घटक दलित आदिवासी का नेटवर्क बनाना है।