झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के अपराधों के मद्देनजर 1948 में मानवाधिकार की सर्वभौमिक घोषणा को अपना कर अंतररााष्ट्रीय समुदाय ने लिंग,धार्मिक और राजनीतिक मान्यताओं राष्ट्रीय और जातीय मूल या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना, सभी लोगों के लिए व्यापक सुरक्षा स्थापित करने का प्रयास किया।यह घोषणा मौलिक,राजनीतिक,आर्थिक,सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को स्थापित करती है। इनमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुँंच का अधिकार,संपत्ति रखने का अधिकार,मतदान का अधिकार और कार्य के बदले वेतन का अधिकार शामिल है।