उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि एक श्रोता है जिनके पास आवास नहीं हैं। आवेदन किया है, जिसके बाद जांच भी हुई। लेकिन अब तक आवास योजना का लाभ प्राप्त नहीं हुआ है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजय पाल चौधरी कहते हैं कि महिलाओं का जमीनी अधिकार उनका अहम हिस्सा होता है। महिलाये कई बार जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित हो जाती हैं। अगर उनका हिस्सा है तो उन्हें तहसील में जा कर मिलना चाहिए। उन्हीं के द्वारा महिलाओं को पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिल सकता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अरविन्द श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि विजय पाल चौधरी द्वारा बताया गया था कि एक महिला के पास जमीन है पर कागज़ में नाम नहीं है जिससे महिला को सरकारी लाभ नहीं मिल सकता है। तो इस पर अरविन्द ने बताया कि महिला रजिस्ट्री विभाग में जाकर वहाँ रेजिस्टर्ड करवा लें। तहसील में जाकर लेखपाल के द्वारा अपनी वसीहत करवा लें जिससे महिला का नाम जमीन में चढ़ जाए
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमजान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से शाबान अली से हुई। शाबान अली कहते है कि इनको आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। इसको लेकर बहुत पहले फॉर्म भरे थे पर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुआ। जाँच के लिए अधिकारी भी नहीं आये
क्या आपके गाँव या मोहल्ले में किसी महिला ने अपने नाम पर जमीन या घर के कागज़ बनवाने की कोशिश की है? क्या उसका जीवन बदला? क्या परिवार का व्यवहार बदला? क्या बेटियों और बहुओं का नाम जमीन और घर के कागज़ में होना चाहिए? कैसे परिवार मजबूत होगा? आपकी राय भले ही पक्ष में हो विपक्ष में अपनी राय जरूर रिकार्ड करें। राय रिकॉर्ड करने के लिए अपने फोन से 3 नंबर का बटन दबाएँ या मोबाइल वाणी ऐप में लाल बटन दबाकर अपनी बात रिकॉर्ड करें।
दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि बहुत सी महिलाओं को पता नहीं है कि उन्हें प्रॉपर्टी का कानूनी हक़ मिला हुआ है। जागरूकता का आभाव नहीं होने से महिलाएँ अपना अधिकार नहीं जानती है। जानकारी ही पहला कदम है महिलाओं की स्थिति बेहतर करने और उन्हें सशक्त करने की दिशा में
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि अगर महिला के पास जमीन हो तो वो भविष्य की प्लानिंग बेटर तरह से कर सकती है। बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य को लेकर सही इन्वेस्टमेंट को समझ कर लागु कर पाएगी। उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब खुद के पास खुद का कुछ रहता है जिस पर हमारा अधिकार होता है जैसे कोई प्रॉपर्टी या अपनी गाड़ी ही क्यों न हो उससे एक अलग ही आत्मविश्वास आता है। उनका हौसला बढ़ता है। जब महिलाओं के नाम अपनी प्रॉपर्टी होगी तो उनका हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का हौसला बढ़ेगा। उन्हें लगेगा की समाज में उन्हें पहचान मिल रहा है ,उनका अस्तित्व बना रहेगा।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं को सशक्त बनाने में भूमि अधिकार एक भूमिका निभा सकता है। कई राज्यों में 'वीमेन लेड फार्मिंग ' चल रहा है। इसका मतलब है महिलाएँ मिलकर खेती करेगी ,जिसमें वो सामान्य खेती या व्यापार को लेकर करेंगी। इसमें महिला जैसे घर में काम करती है वैसे ही वही काम करने पर उन्हें पैसे मिलता है। ये कार्य महिला बहुत अच्छे से तब कर सकती है जब महिला के नाम जमीन होगा। ऐसे में महिला अपना व्यापार स्थापित कर सकती है
