उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली ,मोबाइल वाणी के माध्यम से राम धीरज चौधरी से बात कर रहे है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को ईगो नहीं रखना चाहिए। ईगो में ठेस पहुँचने से स्ट्रेस पैदा होता है। व्यक्ति को अच्छा भोजन करना चाहिए। खानपान पर बराबर ध्यान देना चाहिए।

क्या आपके जीवन में कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई हैं ?आपके के हिसाब से इस तरह की परिस्थिति में अपने आपको तनाव मुक्त रखने के लिए क्या करना चाहिए ? और घर में नशे के कारण झगड़ों से बच्चो पर क्या प्रभाव पड़ता है? और उन्हें इस तरह के परिस्थिति से दूर रखने के लिए माता पिता को क्या करना चाहिए ?

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जिव दास साहू जानकारी दे रहें हैं धान के बिचड़ा को कैसे तैयार किया जाए। उन्होंने बताया कि सारा बिचड़ा एक ही दिन में तैयार नहीं करना चाहिए, बिचड़ा को तैयार करने के लिए क्रमबद्ध तरीक़ा के साथ साथ मौसम का भी ख़ास ध्यान रखना चाहिए .

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमजान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से कौशल अली से हुई। कौशल कहते है कि इंसान को स्वस्थ रहना चाहिए। लोगों से ज़्यादा मेल जोल नहीं रखना चाहिए।मोबाइल का भी इस्तेमाल कम करना चाहिए। बच्चे इससे बहुत प्रभावित होते है। इससे मानसिक संतुलन बिगड़ जाती है। उनका पढ़ाई पर ध्यान नहीं जाता है। आवश्यकता अनुसार ही मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 56 वर्षीय रीना श्रीवास्तव ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि डिप्रेशन मानसिक अवस्था है जो व्यक्ति के मूड ,ऊर्जा और उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को नींद की समस्या ,भूख की समस्या ,ऊर्जा की समस्या होती है। ऐसे व्यक्ति को आत्मविश्वास की कमी होती है। ऐसे व्यक्ति खुद के बारे में नकारात्मक विचार रखते है। डिप्रेशन गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जो दैनिक जीवन को प्रभवित कर सकता है। डिप्रेशन से गुजरने वाले व्यक्ति को मदद लेना ज़रूरी है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 33 वर्षीय खुशबु श्रीवास्तव की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से संजू से हुई। संजू कहती है कि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति का पहचान करना एक महत्वपुर्ण काम है। जो हमें उनके साथ बेहतर तरीके से बातचीत करने या उनकी ज़रूरतों को समझने में मदद कर सकता है। यहाँ कुछ तरीके है जिनसे हम मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति पहचान कर सकते है। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति अपनी भावनाओं ,विचार और व्यवहार को पहचानते हैं। वे जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते है। वे आत्मविश्वास से भरे रहते है। वे सकारात्मक व्यवहार करते है ,सामाजिक रूप से अच्छे रहते है। वे समस्याओं का समाधान करने में सक्षम रहता है और चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम रहता है

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बस्ती से शिखा श्रीवास्तव की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से पल्लवी से हुई।पल्लवी यह बताना चाहती है कि अवसाद से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करना एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है। लेकिन लोगों का समर्थन उन्हें बेहतर महसूस करा सकता है।उन्हें पेशेवर मदद के लिए प्रोत्साहित करें।उनकी देखभाल करें और खुद की देखभाल करें।बार बार सिर दर्द और चक्कर, कई कारणों से हो सकते हैं। मानसिक तनाव विकार से दर्द हो सकता है खासकर जब तनाव लंबे समय तक रहता है।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बस्ती से शिखा श्रीवास्तव,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि जो व्यक्ति डिप्रेशन में होते हैं उनके बातों को सुनना चाहिए।डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति अकेला महसूस करता है।इसलिए लोगों के सुझाव उनको अच्छा महसूस करा सकता है।डिप्रेशन एक गंभीर समस्या है।डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति के साथ रहना चाहिए ,उनको काम करने देना चाहिए ,उनको दवाओं के बारे में बताना चाहिए।पीड़ित व्यक्ति अपनी भावनाओं को बताने में असमर्थ रहता है।पीड़ित व्यक्ति को ठीक होने में समय लगता है।इस तरह के व्यक्ति को समझाना चाहिए कि वह तनाव अधिक नहीं लें।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बस्ती से शिखा श्रीवास्तव की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से रूद्र प्रताप सिंह से हुई। रूद्र प्रताप सिंह यह बताना चाहते है कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों हमारे सामाजिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पहलू हैं जबकि दोनों के बीच कुछ ओवरलैप होता है। वे अलग अलग पहलू हैं जो लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।मानसिक स्वास्थ्य लोगों के भावनात्मक,मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण को फिर संदर्भित करता है या लोगों के विचारों भावनाओं और व्यवहारों को प्रभावित करता है और लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बस्ती से आर.के की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सुरभि से हुई। सुरभि यह बताना चाहती है कि अवसाद से बिना दवा के भी निकला जा सकता है।यह संभव है। अवसाद एक ऐसी समस्या है जिसका इलाज विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है जबकि दवाएं अवसाद के इलाज में मदद कर सकती हैं।कुछ लोगों के लिए दवा अवसाद से निकलना संभव हो सकता है।बिना दवा के अवसाद से निकलने के तरीके चिकित्सा अवसाद के इलाज में मदद कर सकते हैं।एक प्रशिक्षित चिकित्सक व्यक्ति के अपने विचारों और भावनाओं को समझने पर प्रतिबंधित करने में मदद कर सकता है।व्यायाम अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है,नियमित व्यायाम को बढ़ावा देता है जो हमारे मूड को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। सामाजिक समर्थन अवसाद के इलाज में मदद कर सकता है। दोस्तों, परिवार के सदस्यों और समर्थन समूहों में संपर्क में रहना महत्वपूर्ण है।तनाव प्रबंध तकनीकी अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। ध्यान योग और गहरी सांस लेना जैसी तकलीफें तनाव को कम करने में मदद कर सकती हैं। स्वस्थ जीवन शैली अवसाद के इलाज में मदद कर सकती हैं।स्वास्थ्य आहार और पर्याप्त नींद लेना महत्त्वपूर्ण है।दवाएं अवसाद के इलाज में मदद कर सकती हैं। लेकिन वे दुष्प्रभाव पैदा कर सकती हैं।बिना दवा के अवसाद से निकलने में लोग दवाओं के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं।बिना दवा के अवसाद से निकलने से आप आत्मनिर्भरता की भावना विकसित कर सकते हैं।